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दो साल से चल रहा है इंदौर के राजवाड़ा की मरम्मत का काम, पर अभी तक नहीं हो सका पूरा

Work Culture: इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट ने 16 जनवरी 2018 को राजवाड़ा के पुनरुद्धार का काम संबंधित कंपनी को सौंपा था. ...अधिक पढ़ें

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रिपोर्ट: अंकित परमार

इंदौर. इंदौर की पहचान कहे जाने वाले राजवाड़ा के पुनरुद्धार का काम जनवरी 2018 में शुरू हुआ था, पर 2020 जनवरी में समय अवधि समाप्त होने के बावजूद शहर की इस ऐतिहासिक इमारत का उद्धार नहीं हो सका. अभी भी यहां पाइप व लकड़ियों का जंजाल बिखरा पड़ा है. फिलहाल की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि काम को पूरा करने में 2 महीने का समय और लगेगा.

बता दें कि राजवाड़े के कुछ हिस्से बारिश या अन्य किसी कारण से टूट या गिर गए थे. स्मार्ट सिटी मिशन के तहत राजवाड़ा और परिसर के पुनरुद्धार का काम शुरू हुआ था. राजवाड़ा की मुख्य इमारत के जॉइंट खराब हो गए हैं. कहीं कील या लोहे आदि से रिपेयरिंग की गई है, कहीं स्टील का जोड़ लगा दिया गया है. इससे उनमें स्थायी सुधार करने में दिक्कत आ रही है. सात मंजिला इमारत में से तीन मंजिल पत्थर की बनी हैं, जबकि लकड़ी की संरचनाओं से ऊपरी चार मंजिल बनी हैं. हर मंजिल के बीम, कॉलम व ग्रिड आदि अलग-अलग हैं. यानी हर मंजिल का लोड शेयरिंग सिस्टम अलग-अलग है. अभी राजवाड़ा के पिछले हिस्सों का नवीनीकरण हो रहा है. फिलहाल उन हिस्सों में काम हो रहा है, जो बारिश या अन्य किसी कारण से टूट या गिर गए थे.

20% अभी भी बाकी

इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट ने 16 जनवरी 2018 को राजवाड़ा के पुनरुद्धार का काम संबंधित कंपनी को सौंपा था. चार साल बाद प्रोजेक्ट का लगभग 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है. अब 20 प्रतिशत बचा काम पूरा होने में कम से कम 2 महीने लगने का अनुमान है. इंदौर निगम के निगमायुक्त प्रतिभा पाल के मुताबिक, आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर व विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण मेनन के दिशा निर्देश मैं रुका हुआ काम जल्द पूरा करने की कोशिश जारी है. पूरा प्रयास है कि नवंबर 2022 तक राजवाड़ा के पुनरुद्धार का काम समाप्त किया जाए. दौर निगम के आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर व विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण मेनन के दिशा निर्देश मैं रुका हुआ काम जल्द पूरा करने की कोशिश जारी है. पूरा प्रयास है कि नवंबर 2022 तक राजवाड़ा के पुनरुद्धार का काम समाप्त किया जाए.

समस्या की वजह

राजवाड़ा की मुख्य इमारत की चौथी से सातवीं मंजिल के बीच लकड़ी के खिड़की दरवाजे में जॉइंट खुलने उनके कमजोर होने जैसी समस्याएं आ रही हैं. इस वजह से ऊपरी हिस्सों में काम नहीं हो पा रहा है. इसके लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने आईआईटी चेन्नई से संपर्क साधा था.

इमारत को झुकने से रोकने की कोशिश

आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर व विशेषज्ञ अरुण मेनन के अनुसार राजवाड़ा के उत्तर पूर्वी क्षेत्र की दीवारों पर आई दरारों का कारण यूरिनल है. वही राजवाड़ा के झुके हुए भाग को पूर्व की स्थिति में लाना अब संभव नहीं है, लेकिन ऐसे उपाय किए जा सकते हैं, जिनसे इमारत और न झुके. प्रो. मेनन द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर कार्ययोजना बनाकर बचा काम समयबद्ध तरीके के साथ तेजी से पूरा किया जाएगा. उन्होंने सुझाव दिया कि सभी फ्लोर को मजबूती देने के लिए कुछ प्रयास करने होंगे. राजवाड़ा के तीन फ्लोर पत्थरों के बने हैं. ऐसे में पत्थरों के जोड़ों में यदि गैप आ रही है तो उसे भरना होगा. इसके अलावा लकड़ी से बने ऊपर के चारफ्लोर को रेट्रो फिटिंग वर्क से मजबूती दी जाएगी. इसके तहत कमजोर लकड़ी के हिस्से को टॉयराड से बांधा जाएगा.

Tags: Historical monument, Indore news, Mp news

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