एक शहर की सक्सेस स्टोरी, जानिए- इंदौर कैसे बना देश का सबसे साफ शहर

देश के 4000 शहरों में स्वच्छता अभियान के तहत कराए गए सर्वे में सफाई के मामले में इंदौर को पहली रैंकिंग मिली है.

News18Hindi
Updated: May 16, 2018, 8:43 PM IST
एक शहर की सक्सेस स्टोरी, जानिए- इंदौर कैसे बना देश का सबसे साफ शहर
देश के 4000 शहरों में स्वच्छता अभियान के तहत कराए गए सर्वे में सफाई के मामले में इंदौर को पहली रैंकिंग मिली है.
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Updated: May 16, 2018, 8:43 PM IST
आपने अब तक कई सक्सेस स्टोरी पढ़ी होंगी. कोई परीक्षा में अव्वल आया तो किसी ने बिजनेस में ऊंचा मुकाम हासिल किया. परिस्थितियों को मात देकर दुनिया में परचम लहराने की कई मिसालें देखने को मिलती हैं, लेकिन न्यूज18 आज आपको एक शहर की सक्सेस स्टोरी बताने जा रहा है, जो अब लगातार दूसरी बार देश का सबसे साफ शहर बन गया.

देश के 4000 शहरों में स्वच्छता अभियान के तहत कराए गए सर्वे में सफाई के मामले में इंदौर को पहली रैंकिंग मिली है.

साल 2015 के स्वच्छता सर्वेक्षण में 25वें स्थान पर रहा इंदौर अब नंबर-1 पायदान पर पहुंच गया है. इंदौर के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था. साल 2011-12 में इंदौर सफाई के मामले में 61वें स्थान पर था.

चार साल बाद 2015 में इंदौर 25वें पायदान पर आ गया था. करीब सवा दो साल बाद अब इंदौर ने स्वच्छता के मामले में नई मिसाल पेश की थी और नंबर वन का ताज हासिल किया था. इंदौर ने अब इसे बरकरार रखते हुए दोबारा देश का सबसे साफ शहर बन गया है.


ऐसे क्लीन हुआ इंदौर
इंदौर में नगर निगम ने सैकड़ों कर्मचारियों और आधुनिक मशीनों से सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाया. इतना ही नहीं, इंदौर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर भी काफी ज्यादा काम हुआ है. इंदौर शहर और जिला दोनों ही खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं. शहरी व ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है.

- शहर में घर-घर से कचरा उठाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया.
- शहर में हर घर से कचरा उठाने के लिए नगर निगम का वाहन पहुंचता है.
- घर से कचरा उठाने के वक्त ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर लिया जाता है.
- रहवासी इलाके में दिन में एक बार जबकि व्यावसायिक इलाकों में दो बार कचरा कलेक्ट किया जाता है.
- क्लीन इंदौर के लिए शहर में नगर निगम और जिला प्रशासन ने विशेष जागरुकता अभियान चलाए.
- शहर को खुले डस्टबिन से मुक्ति दिलाने के लिए डस्टबिन फ्री अभियान चलाया गया.
- इस अभियान के तहत सुंदर और पूरी तरह से बंद दो डस्टबिन लगाए गए, जिसमें सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकठ्ठा होता है.
- शहर में 10 जगहों पर ट्रांसपोर्टेशन हब बनाए गए, यहां से सारा कचरा ट्रेंचिंग ग्राउण्ड पहुंचता है.
- शहर में सात हजार सफाईकर्मी हैं जो दिन-रात सफाई में जुटे रहते हैं. इनमें से 60 प्रतिशत महिला कर्मी हैं.
-इंटरनेशनल वेस्ट मैनेजमेंट के 200 कर्मी गाड़ियों से सड़कें साफ करते हैं.
-रात में मशीनों से पूरे शहर की 500 किमी लंबी मुख्य सड़कों की सफाई की जाती है.

इंदौर शहर में गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगाया गया है. शहर में गंदगी फैलाने वालों पर एक लाख रुपए तक स्पॉट फाइन किया जाता है. थूकने, खुले में शौच या पेशाब करने पर 100 से 500 रुपए तक का जुर्माना है. शहर में 172 पब्लिक और 125 कम्युनिटी टॉयलेट बनाए गए हैं. वहां दिन में चार बार सफाई होती है.

-शहर का 100 प्रतिशत कचरे का डोर टू डोर कलेक्शन हो रहा है.
-पूरा शहर कचरा पेटी मुक्त है.
-इंदौर में 100 प्रतिशत गीले और सूखे कचरे का निपटान होता है.
-ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे का निपटान करके उसके ऊपर बगीचे बनाए जा रहे हैं.

शहर ने दो साल में कचरे के निपटान और सफाई के लिए कई ऐसे प्रयास किए है, जो देश के किसी अन्य शहर में नहीं है. इतना ही नहीं शहर के जगह-जगह पब्लिक टॉयलेट बनाए गए है, जिससे शहर के किसी भी हिस्से में गंदगी नजर नहीं आती है.

बता दें कि इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ ने शहर के दोबारा नंबर वन बनने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों की वजह से इंदौर इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में नंबर वन बना है. महापौर ने इंदौर की जनता की भी दिल खोलकर तारीफ की है.

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