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नगरीय निकाय चुनाव : इंदौर में BJP के पूर्व विधायक बढ़ा रहे हैं पार्टी की मुश्किल, कांग्रेस ने अपनाया नया फॉर्मूला

mp-बीजेपी-कांग्रेस दोनों में मेयर पद के कई दावेदार हैं.
mp-बीजेपी-कांग्रेस दोनों में मेयर पद के कई दावेदार हैं.

इंदौर (Indore) महापौर (Mayor)के लिए अभी तक दोनों प्रमुख दलों में जो दावेदार सामने आ रहे हैं,वे या तो विधायक हैं या विधायक का चुनाव हारे हुए हैं. इसकी वजह ये है कि बीते 20 साल में सीधे इलेक्शन में चुने गए चार में से दो महापौर विधायक ही रहे हैं.

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इंदौर.इंदौर (Indore) में नगरीय निकाय चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गयी है. मेयर और पार्षद पद के लिए टिकट की दावेदारी और मारामारी चरम पर है. बीजेपी (BJP) में पूर्व विधायक और कांग्रेस (Congress) में वर्तमान विधायक टिकट के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं. बीजेपी के पूर्व विधायक एक हद तक पार्टी की मुश्किल बढ़ा रहे हैं. वर्तमान विधायकों को टिकट न देने के बीजेपी के फॉर्मूले से ये पूर्व विधायक अब मेयर पद का टिकट पाने के लिए जुगत लगा रहे हैं.उधर सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस के मौजूदा विधायक टिकट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं.

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेयर का पद अनारक्षित होने से दावेदारों की फौज खड़ी हो गई है. हालांकि बीजेपी ने इस बार वर्तमान विधायकों को टिकट न देने का फॉर्मूला तैयार किया है. इस फॉर्मूले ने पूर्व विधायकों की उम्मीद जगा दी है. वे टिकट की जोड़तोड़ में लग गए हैं औऱ पार्टी के बड़े नेताओं से संपर्क साधने में लगे है.इनमें ऐसे पूर्व विधायक हैं जिन्होंने इस उपचुनाव में बीजेपी की नैया पार लगवाई है. इसी का पुरस्कार वो चाहते हैं. पूर्व विधायकों के टिकट मांगने से पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं.कांग्रेस वर्तमान विधायकों पर ही विश्वास जता रही है. यहीं वजह है कि कांग्रेस विधायक भी जोड़तोड़ में लगे हुए हैं.

पूर्व विधायक दावेदार
मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटके नगरीय निकाय चुनाव अब होने को हैं. तारीखों का ऐलान नहीं हुआ मगर मेयर और अध्यक्ष के पद आरक्षित हो गए. उपचुनाव की जंग फतह करने के बाद बीजेपी के हौसले बुलंद हैं,वहीं कांग्रेस ने भी निकाय चुनाव की बाजी जीतने की तैयारी तेज कर दी हैं. इंदौर महापौर की सीट अनारक्षित होने से कई दावेदार सामने आ गए हैं.बीजेपी की बात की जाए तो पूर्व विधायक जीतू जिराती,सुदर्शन गुप्ता और गोपीकृष्ण नेमा टिकट की चाह में आला नेताओं से संपर्क कर रहे हैं. इनमें जीतू जिराती बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. वे उपचुनाव में हाटपिपल्या के सह प्रभारी रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है. इसलिए वे अब इसके पुरस्कार के तौर पर मेयर का टिकट चाह रहे हैं.दूसरे नेता सुदर्शन गुप्ता है. वे पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. उनकी प्रदेश में सत्ता परिवर्तन में भूमिका रही है. गुप्ता की ड्यूटी बेंगलुरू में उस जगह लगायी गयी थी जहां कांग्रेस विधायक ठहरे हुए थे. इसलिए वे भी इसका पारितोष चाहते हैं.
खुलकर आए नेमा


पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने तो खुलेआम अपनी दावेदारी ठोक दी है. इंदौर नगर अध्यक्ष और दो बार विधायक रहे गोपीकृष्ण नेमा को भी नेपानगर उपचुनाव का सह प्रभारी बनाया गया था. वहां भी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज कर कांग्रेस से सीट छीन ली. इसलिए वे भी चाहते हैं कि उनकी मेहनत का फल इंदौर मेयर के टिकट के रूप में मिले.वो कहते हैं कि टिकट मांगना उनका अधिकार है. पार्टी को इस पर जरूर विचार करना चाहिए.



कांग्रेस में भी कतार
कांग्रेस अपने मौजूदा विधायकों को ही इंदौर मेयर का चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है. इंदौर से कांग्रेस इस समय तीन विधायक हैं. जीतू पटवारी, संजय शुक्ला और विशाल पटेल.इनमें जीतू पटवारी ने तो चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है. उसके बाद अब विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल टिकट की जोड़ तोड़ में लग गए हैं. विशाल पटेल का कहना है वे भी मेयर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. पार्टी युवाओं को टिकट देने की पैरवी कर रही है इसलिए उनकी दावेदारी भी मजबूत बनती जा रही है. पार्टी टिकट देगी तो वे जरूर चुनाव लड़ेंगे.

कांग्रेस में नया फॉर्मूला
इंदौर महापौर के लिए अभी तक दोनों प्रमुख दलों में जो दावेदार सामने आ रहे हैं,वे या तो विधायक हैं या विधायक का चुनाव हारे हुए हैं. इसकी वजह ये है कि बीते 20 साल में सीधे इलेक्शन में चुने गए चार में से दो महापौर विधायक ही रहे हैं.दोनों को भाजपा ने ही मौका दिया.कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड़ दोनों विधायक रहते हुए भी मेयर के पद पर आसीन रहे.यही वजह है कि इस बार कांग्रेस भी इसी फॉर्मूले को आजमा रही है.
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