वोकल फॉर लोकल: स्ट्रीट डॉग्स संग मनाया स्वतंत्रता दिवस, टिक-टॉक की तरह विदेशी नस्ल के कुत्तों को भी बैन करने की मांग
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वोकल फॉर लोकल: स्ट्रीट डॉग्स संग मनाया स्वतंत्रता दिवस, टिक-टॉक की तरह विदेशी नस्ल के कुत्तों को भी बैन करने की मांग
स्वतंत्रता दिवस पर इंदौर में जागरुकता अभियान शुरू किया गया.

वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local) की मुहिम को बढ़ावा देते हुए मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर में नागरिकों के एक समूह ने सरकार से मांग की है कि देशी कुत्तों की नस्ल के प्रति जागरुकता के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए.

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इंदौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) शहर में स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर डॉगटाइजेशन मुहिम से जुड़े लोगों ने देश को महत्वपूर्ण संदेश दिया. इसमें बताया गया कि यदि सड़क पर नजर आ रहे स्ट्रीट डॉग्स के डॉग बाइट से बचना है या उनकी आबादी को काबू में करना है तो इस समस्या को जनभागीदारी से ही दूर किया जा सकता है. इस साल कोरोना महामारी के चलते भारत में जो सबसे ज्यादा प्रचलित वाक्य है वो है वोकल फॉर लोकल, जहाँ पूरा भारत देश स्वदेशी अपनाओ मुहिम को अपने अपने स्तर पर सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं इन्दौर शहर के जागरूक नागरिक इसी तर्ज पर एक महत्वपूर्ण संदेश देश भर के नागरिकों को संदेश दे रहे हैं कि भारतीय नस्ल सर्वप्रथम.

ये नागरिक सभी देशवासियों से कह रह रहे हैं कि हमारे देश में बहुत सारे पशु प्रेमी लोग है, परंतु उनका झुकाव अधिकतर विदेशी नस्ल की ब्रीड्स की तरफ ज्यादा है. जबकि हमारे देश में बहुत सारे स्ट्रीट डॉग्स हैं, जो किसी भी प्यार भरी गोद में जाने के लिए आस लगाए बैठे हैं. कई लोग इन स्ट्रीट डॉग्स की अनदेखी करते हुए पैसे की चकाचौंध में विदेशी ब्रीड्स को के डॉग्स खरीद रहे हैं, जिसके चलते हमारे अपने देशी नश्ल के श्वान अपने ही देश में लावारिस जैसा जीवन व्यतीत करने पर मजबूर हैं. वे बेसहारा, बेजुबान प्राणी भूखे प्यासे अपने ही लोगों के प्यार से वंचित शहर की गलियों में आवारा घूमते हुए लोगों को अपना शिकार बनाते हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर स्वदेशी अपनाने का संदेश
इंदौर के पशु प्रेमी प्रधानमंत्री आग्रह कर रहे हैं कि जिस तरह टिकटॉक समेत विदेशी एप पर  प्रतिबंध लगाया गया है. उसी तरह इन विदेशी नस्ल के जीवों पर भी तब तक प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, जब तक अपने देश का एक एक स्ट्रीट डॉग को घर और प्यार भरा वातावरण नहीं मिल जाता. देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर सभी लोग स्वदेशी अपनाओ की मुहिम के चलते हमारे अपने प्यारे देशी डॉग्स को अपनाएं. विदेशी नस्ल के जीव 50 हज़ार से 1 लाख रुपए कीमत तक खरीदे और बेचे जाते हैं. उनका बहुत ही बड़ा व्यापार हो रहा है.
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