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प.बंगाल चुनाव : MP में रह रहे प्रवासी बंगालियों से मतदान की अपील करेंगे BJP के ये दिग्गज

इंदौर में प.बंगाल के करीब 12 हजार बंगाली रहते हैं.

इंदौर में प.बंगाल के करीब 12 हजार बंगाली रहते हैं.

Indore.इंदौर में रहने वाले अधिकतर बंगाली लोग पश्चिम मिदनापुर,वर्धमान,हावड़ा और हुगली जिलों के हैं.लॉकडाउन के बाद वो तीन महिने पहले ही वहां से इंदौर लौटे हैं.

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इंदौर.हर चुनाव में चुनाव आयोग (Election commission) की मंशा रहती है कि शत-प्रतिशत मतदान हो,लेकिन पश्चिम बंगाल में हो रहे विधानसभा चुनाव में इंदौर में रह रहए प्रवासी बंगाली कारीगरों की कोई दिलचस्पी नहीं है. इसकी वजह आर्थिक तंगी बताया जा रहा है.क्योंकि परिवार की हालत खस्ता होने से वो यहां से अब वापस वोट डालने नहीं जाना चाहते हैं.

इंदौर में बंगाली समाज के 12 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं. पूरे एमपी की बात की जाय तो ये संख्या लाखों में पहुंच जाएगी.ऐसे में ये संख्या सरकार बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है. इसीलिए कांग्रेस और बीजेपी की निगाहें इन बाहरी वोटरों पर लग गई हैं.इन कारीगरों को अब खुद पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मनाएंगे.

एक एक वोट पर नज़र
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख जैसे जैसे नजदीक आती जा रही है, सियासी दलों की धड़कन बढ़ती जा रही हैं. बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बने इस चुनाव में दोनों दलों की एक एक वोटर पर नजर है. यही वजह है कि बीजेपी,तृणमूल कांग्रेस के अलावा कांग्रेस भी हर एक वोटर को साधने में लगी है. लेकिन इंदौर सहित मध्यप्रदेश में रोजी रोटी कमा रहे सोने चांदी और मूर्तियां बनाने वाले प्रवासी बंगाली कारीगरों को अपने प्रदेश के चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है.इसकी वजह पैसा बताया जा रहा है.
3 महिने पहले घर से लौटे


पिछले करीब एक साल से बेरोजगारी की मार झेल रहे ये कारीगर अभी तीन महिने पहले बंगाल से लौटे हैं.इनमें से अधिकतर कारीगर इंदौर के सर्राफा बाजार में सोने चांदी के आभूषण बनाते हैं.अभी 22 अप्रैल से शादियों का सीजन शुरू होने जा रहा है.गहनों और सोने चांदी के बर्तन बनाए जा रहे हैं.यही वजह है कि वो वोट डालने नहीं जाना चाहते हैं.

मंदी के दौर में चुनाव से दूरी
सर्राफा बंगाली समाज के अध्यक्ष कमलेश बेरा का कहना है वे लोग बंगाल चुनाव में हिस्सेदारी तो करना चाहते हैं लेकिन उनकी अपनी मजबूरी है. इस बार कोरोना के कारण दुर्गा और गणेश प्रतिमाओं से भी उनकी कमाई नहीं हुई.इस बार कोरोनो के साथ साथ होलिका अष्टक लगने से विवाह के शुभ मुहुर्त बहुत कम हैं. गिनी चुनी शादियां हो रही हैं ऐसे में बंगाली कारीगरों के सामने आर्थिक संकट के हालात हैं.यही वजह की हम लोगों ने चुनाव से दूरी बना रखी है.

27 मार्च से शुरू होगा मतदान
पिछले साल मार्च में लॉक डाउन होने के बाद ये बंगाली अपने अपने गांव चले गए थे.इंदौर में रहने वाले अधिकतर बंगाली लोग पश्चिम मिदनापुर,वर्धमान,हावड़ा और हुगली जिलों के हैं. बंगाल में 27 मार्च को पहले चरण का मतदान है उसके बाद 1,6,10,17,22,26 और 29 अप्रैल को वोटिंग है जबकि 2 मई को नतीजे आएंगे.

भाजपा से नाराज़गी
इस बार का चुनाव दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और बीजेपी के लिए भी नाक का सवाल बना हुआ है.बंगाली कारीगरों की बेरूखी के लिए कांग्रेस बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा रही है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है बंगाली कारीगर वोट डालने के लिए परेशान नहीं हैं बल्कि भाजपा को लेकर उनकी नाराजगी है. जिस तरह लॉकडाउन में उनकी कोई सुध नहीं ली गई,उन्हें भोजन के लिए सामाजिक संस्थाओं पर निर्भर रहना पडा़,सरकार ने उनकी कोई खैर खबर नहीं है इसीलिए वो आहत हैं.

कैलाश विजयवर्गीय करेंगे अपील
बीजेपी के प्रवक्ता उमेश शर्मा का कहना है पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय इंदौर से हैं इसलिए बीजेपी की कोशिश है कि न केवल इंदौर बल्कि मध्यप्रदेश में रह रहा हर बंगाली वोटर विधानसभा चुनाव में मतदान करे.इसके लिए पार्टी सर्राफा कारीगरों से व्यक्तिगत बातचीत करेगी.सर्राफा व्यापारी एसोसिएशन से भी आग्रह किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से भी वोट डालने की अपील कराई जाएगी.

मतदान में दिलचस्पी नहीं
चुनाव में एक-एक वोट का महात्व होता है. ऐसे में अब देखने वाली बात ये होगी कि इंदौर सहित एमपी में रहने वाले कितने बंगाली समाज के लोग वोट करने जाते हैं.हालांकि वे चुनाव को लेकर ज्यादा गंभीर दिखाई नहीं दे रहे हैं.
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