Wow! उम्र 67 साल, ऑक्सीजन लेवल 99, जानिए आखिर क्यों ये दादाजी पीपल के पेड़ पर जमाते हैं आसन

इंदौर के 67 साल के दादाजी ने लोगों के लिए मिसाल पेश की है.

इंदौर के 67 साल के दादाजी ने लोगों के लिए मिसाल पेश की है.

Indore News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर. यहां के 67 साल के राजेंद्र पाटीदार मिसाल पेश कर रहे हैं. वे रोज पीपल पर चढ़ जाते हैं और ऑक्सीजन लेते हैं. उनका ये काम लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है.

  • Last Updated: May 16, 2021, 7:44 AM IST
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इंदौर. मध्य प्रदेश में कोरोना हॉटस्पॉट रहे इंदौर (Indore) में एक बुजुर्ग ऑक्सीजन और प्रकृति प्रेम का उदाहरण पेश कर रहे है. रंगवासा के 67 वर्षीय राजेंद्र पाटीदार ने रोज शुद्ध हवा और ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाले पीपल के पेड़ पर ही अपना डेरा जमाया है. सुबह से लेकर शाम तक उन्हें जब भी मौका मिलता है वे पीपल के पेड़ पर चढ़ जाते हैं. जबकि उनका ऑक्सीजन लेवल 99 है.

राजेंद्र को इस उम्र में भी पेड़ पर चढ़ने में महारथ हासिल है. वह बाकायदा अपनी कुर्सी लेकर पेड़ पर चढ़ते हैं और आसन लगाते हैं. इसके साथ-साथ वे वहीं कपाल भाती, प्राणायाम और अन्य योग भी करते हैं. बीते 15 से 20 दिनों में पीपल के पेड़ पर आसन जमाने वाले पाटीदार की इस पहल से ग्रामीण भी प्रेरित हो रहे हैं. गांववालों को पाटीदार पीपल के पेड़ का महत्व बताते हैं. पेड़ पर चढ़ने को लेकर पहले उनका परिवार विरोध करता था, लेकिन अब परिवार पूरा साथ देता है.

इंदौर में हो रही मौतों से आया आइडिया

इस दौरान यदि कोई राजेंद्र से संवाद करना चाहता है तो वे पेड़ के ऊपर से ही बात करते हैं. उनका दावा है कि पीपल के पेड़ के साथ जो लोग ऑक्सीजन की जुगलबंदी करते हैं उन्हें न तो कोरोना हो सकता है, न ही कभी उनका ऑक्सीजन लेवल घट सकता है. पेशे से कृषक राजेंद्र पाटीदार के घर के पास दो से तीन पीपल का पेड़ हैं. इनमें एक पेड़ उनके घर से सटा हुआ है. जब उन्होंने सुना कि इंदौर में ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों में कई लोगों की मौत हो गई तो उन्होंने इस अनूठी विधि को अपनाते हुए पीपल के पेड़ पर बैठने का फैसला किया.
पोता भी चला दादाजी की राह

बीते 15 दिनों से पीपल के पेड़ पर डेरा जमाने वाले पाटीदार बताते हैं कि यहां बैठने से उनका ऑक्सीजन लेवल 67 साल की उम्र में भी 99 बना हुआ है. चढ़ने-उतरने से भी उनका शरीर फिट रहता है और वे दिन भर ताजा-तरीन महसूस कर रहे हैं. इसका श्रेय वे पीपल के पेड़ को ही देते हैं. इस बीच उनका पोता कनिष्क पाटीदार भी दादा की मदद करता है. अब वो भी दादाजी के साथ पेड़ पर बैठता है.

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