कोरोना संकट में 52 हज़ार लोग बनना चाहे फर्जी स्ट्रीट वेंडर्स, जबलपुर निगम ने निरस्त किया आवेदन
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कोरोना संकट में 52 हज़ार लोग बनना चाहे फर्जी स्ट्रीट वेंडर्स, जबलपुर निगम ने निरस्त किया आवेदन
जबलपुर में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कई फर्जी आवेदन आए.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) में जितने पात्र इस योजना का लाभ नहीं लिए, उससे ज्यादा अपात्रों ने अपना पंजीकरण करवा लिया.

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जबलपुर. शहरी क्षेत्र में लागू की गई प्रधानमंत्री पथ विक्रेता आत्मनिर्भर निधि योजना कहने को स्ट्रीट वेंडर्स के उत्थान की दिशा में लागू की गई थी. लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) में जितने पात्र इस योजना का लाभ नहीं लिए, उससे ज्यादा अपात्रों ने अपना पंजीकरण करवा लिया. जबलपुर में इस योजना के अंतर्गत 87000 आवेदन प्राप्त किए गए. आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद सरकार ने इसे अलग-अलग फेस में बांटा. पहले फेज में 27000 पथ विक्रेताओं को लाभ देने की योजना बनी, जिससे उन्हें कम ब्याज में सब्सिडी पर 10000 की राशि देने की बात कही गई.

कोरोना की आमद मार्च महीने में हो गई थी और जून महीने तक कहीं ना कहीं सारा व्यापार ही ठप्प रहा. इस बीच पथ विक्रेताओं को लाभ दिलाने के लिए इस योजना को एक बड़ी राहत माना गया. जबलपुर नगर निगम आयुक्त अनूप सिंह ने बताया कि 87 हजार आवेदनों मे से 52 हजार आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है. ये सभी आवेदन ऐसे लोगों ने किए थे जो पथ विक्रेताओ के मापदंडों पर खरे नहीं उतरते थे. या यू कह ले कि योजना का लाभ लेने के लिए 52 हजार लोग फर्जी पथ विक्रतो बन बैठे.

जांच में हुआ खुलासा
नगर निगम आयुक्त अनूप सिंह ने बताया कि टीम द्वारा अपने जोनल कार्यालयों में जमा आवेदनों की जांच की गई तो सच्चाई सामने आ गई. इसके बाद आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 सितंबर को देशभर के कई स्ट्रीट वेंडर से वर्चुअल बातचीत करेंगे. इसको लेकर नगर निगम में तैयारियां की जा रही हैं. हालांकि अपात्रों के आवेदन निरस्त होने के बाद जबलपुर ​नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.
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