लाइव टीवी

इस एक नियम से डूब सकता है 900 डॉक्टरों का करियर, जा सकती है नौकरी

News18 Madhya Pradesh
Updated: September 23, 2019, 5:23 PM IST
इस एक नियम से डूब सकता है 900 डॉक्टरों का करियर, जा सकती है नौकरी
जबलपुर स्थित NSCB मेडिकल कॉलेज.

जबलपुर मेडिकल कॉलेज (NSCB Medical College Jabalpur) से पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रामीण इलाकों में एक साल सेवा को लेकर सरकार से अनुबंध की शर्तों को डॉक्टरों ने नहीं माना. ऐसे डॉक्टरों पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) कर सकता है कार्रवाई.

  • Share this:
जबलपुर. मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा तो करना चाहते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं. एमबीबीएस (MBBS Course) की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐसे सभी छात्रों के साथ सरकार बाकायदा एग्रीमेंट करती है. इस एग्रीमेंट की प्रमुख शर्त यह होती है कि छात्रों को एक साल तक ग्रामीण इलाकों में सेवा देनी होगी. लेकिन मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र, इस एग्रीमेंट की शर्तों की परवाह नहीं करते. इसीलिए तो जबलपुर मेडिकल कॉलेज (NSCB Medical College Jabalpur) के 900 छात्रों ने सरकार के साथ एग्रीमेंट किया, सालभर तक स्टाईपेंड (Stipend) भी लिया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं नहीं दीं. अब सरकार ऐसे सभी डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ, तो शुरू होने से पहले ही इन डॉक्टरों की नौकरी समाप्त हो जाएगी.

लंबे समय से चल रहा खेल
जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज (NSCB Medical College Jabalpur) के 900 डॉक्टरों को सरकार की इस सेवा-शर्त के उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है. ये डॉक्टर वर्ष 2002 से लेकर 2016 बैच तक के हैं. कॉलेज के डीन डॉ. प्रदीप कसार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में सेवा देने के लिए इन डॉक्टरों को स्टाईपेंड का भुगतान भी किया गया, लेकिन किसी ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई. डॉ. कसार ने बताया कि सरकार ने सभी 900 छात्रों को स्टाईपेंड के मद में 32 करोड़ रुपए का भुगतान किया है.

एमसीआई को लिखा पत्र

जबलपुर मेडिकल कॉलेज ने अनुबंध शर्तों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टर्स का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को पत्र लिखा है. इसके पूर्व डॉक्टर्स को नोटिस भी दिए जा चुके हैं, जिसमें शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं न देने पर किए गए भुगतान को लौटाने का आदेश दिया गया था. लेकिन किसी भी डॉक्टर ने इन नोटिस का न तो जवाब दिया और न ही स्टाईपेंड लौटाया. अब जबकि मेडिकल कॉलेज ने इस मामले पर संज्ञान लिया है और इसके आधार पर एमसीआई सभी 900 डॉक्टरों पर कार्रवाई करती है, तो सभी का करियर खतरे में आ सकता है. क्योंकि रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद ये सभी औपचारिक रूप से डॉक्टर नहीं रह जाएंगे.

(पवन पटेल की रिपोर्ट)

यह भी पढ़ें - 
Loading...

हनी ट्रैप मामला: रिमांड अवधि बढ़ने से बेहोश हुई मुख्‍य आरोपी मोनिका यादव, कोर्ट ने मानी पुलिस की मांग

हनी ट्रैप: गोरा रंग और नीली आंखों के चलते लगती थी रूसी, ऐसे फांसती थी अपने हुस्न के जाल में

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए जबलपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 23, 2019, 4:47 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...