आतंकवादियों से जुड़े हो सकते हैं एके-47 के अंतरराज्यीय तस्करों के तार

AK 47 तस्करी में तीसरा आरोपी भी गिरफ़्तार, नक्सलियों-आतंकवादियों से जुड़े हो सकते हैं तार AK 47 तस्करी का पूरा मामला पैसे के लालच का खेल है. आरोपी पुरुषोत्तमलाल रजक, शीलेन्द्र और सुरेश ठाकुर अब पुलिस गिरफ़्त में हैं. पुलिस अब इनके नक्सली कनेक्शन का पता लगा रही है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: September 7, 2018, 9:11 AM IST
आतंकवादियों से जुड़े हो सकते हैं एके-47 के अंतरराज्यीय तस्करों के तार
AK 47 Smuggling
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Updated: September 7, 2018, 9:11 AM IST
एके-47 तस्करी के मामले में आरोपी पुरुषोत्तमलाल रजक, शीलेन्द्र और सुरेश ठाकुर अब जबलपुर पुलिस गिरफ्त में हैं. पुलिस अब इनके नक्सली कनेक्शन का पता लगा रही है. पुलिस के मुताबिक पूरा मामला पैसे और लालच का खेल है.

आरोपियों के कब्ज़े से 11 लाख 78 हज़ार नगद, राइफल सुधारने वाली मशीन, इनोवा कार सहित अन्य उपकरण ज़ब्त किए गए. ये सारे हथियार RSSD गो-डाउन से सप्लाई किए गए. तस्करी का सारा खेल खराब हो चुकी AK 47 की आड़ में होता था. उन रायफल को ठीक कर उनकी तस्करी की जा रही थी. आरोपी अब तक कुल 70 AK 47 मुंगेर सप्लाई कर चुके थे.

पकड़े गए आरोपियों में से सुरेश ठाकुर COD में सीनियर स्टोर मैनेजर है और सुरेश ठाकुर शस्त्रसाज था. वो फैक्ट्री से रिटायर हुआ था. तीसरा आरोपी शीलेन्द्र पुरुषोत्तम का बेटा है. पुलिस को शक है कि इनके तार नक्सलियों, आतंकवादियों या बिहार के शातिर गिरोह से जुड़े हो सकते हैं. अब COD फैक्ट्री के कई अन्य कर्मचारी भी पुलिस की रडार पर हैं.

बुधवार को ही पुलिस ने खुलासा किया था कि ए के 47 तस्करी के तार जबलपुर के सुरक्षा संस्थान से जुड़े थे. यहां से अब तक 100 से ज़्यादा AK 47 की तस्करी की जा चुकी है. तस्करी के इस रैकेट में सुरक्षा संस्थान के अफसर, कर्मचारियों के साथ सिविल अफसर भी अब पुलिस के रडार पर हैं.

आरोपी एक्स सर्विसमैन पुरुषोत्तम लाल तस्करी के सिलसिले में 29 बार मुंगेर जा चुका था. ऑनलाइन बुकिंग के टिकिट्स मिले हैं. वो 2008 में जबलपुर के सुरक्षा संस्थान से रिटायर हुआ था. रिटायरमेंट के चार साल बाद 2012 से वो हथियारों की तस्करी में लिप्त हो गया. बिहार के मुंगेर में ये हथियार सप्लाई किए जा रहे थे. जबलपुर आर्मी बेस से उसका लंबे समय से कनेक्शन था.

जांच टीम का दावा है कि वो जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफ़ाश कर देगी. पुलिस का कहना है आर्मी बेस और फैक्ट्री के अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से तस्करी की जा रही थी. इसमें कुछ सिविल लोग भी शामिल थे. पुलिस की रडार पर अब वो सब हैं. एके 47 तस्करी के इस केस का बिहार की मुंगेर पुलिस ने खुलासा किया था.

भारत के इतिहास में किसी भी सुरक्षा संस्थान से हथियारों की तस्करी और वो भी इतने बड़े पैमाने पर किए जाने का संभवत: ये पहला मामला है. पूरे मामले में अब इंटेलिजेंस और सुरक्षा जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं.

(जबलपुर से प्रतीक मोहन त्रिवेदी की रिपोर्ट)

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