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जबलपुर: एम्बुलेंस घोटाले में घिरे भाजपा के इस पूर्व मंत्री की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, HC में लगी याचिका

भाजपा के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे एंबुलेंस घोटाले में मुश्किल में पड़ते नजर आ रहे हैं.

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री रहे ओमप्रकाश धुर्वे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दीनदयाल चलित अस्पताल योजना के नाम पर जिस एंबुलेंस घोटाले ने धुर्वे दंपत्ति की मुश्किलों को बढ़ा कर रखा था, उसका जिन्न एक बार फिर निकल आया है.

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जबलपुर. मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री रहे ओमप्रकाश धुर्वे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. एम्बुलेंस घोटाले मे घिरे पूर्व मंत्री धुर्वे के खिलाफ फिर से हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका दाखिल की गई है. दीनदयाल चलित अस्पताल योजना के नाम पर जिस एंबुलेंस घोटाले ने धुर्वे दंपत्ति की मुश्किलों को बढ़ा कर रखा था उसका जिन्न एक बार फिर निकल आया है.

एक जनहित याचिका वीरेंद्र केसवानी द्वारा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर की गई है, जिसमें इस मामले में अब तक किसी भी तरह की कार्यवाही ना होने का जिक्र है, जबकि मामले में पूर्व में हुई विभागीय जांच में लाखों के रिकवरी और FIR के आदेश भी हो चुके हैं. पूरा मामला 2012-13 वित्तीय वर्ष से जुड़ा हुआ है, जब प्रदेश में दीनदयाल चलित अस्पताल योजना संचालित थी. योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में किराए से ऐसी एंबुलेंस मुहैया कराई जानी थी. जो अस्पताल नुमा हो और चलते-फिरते जरूरतमंदों को इलाज मुहैया कराने में सक्षम हो. इस योजना के तहत गजानन शिक्षा एवं जन सेवा समिति को ठेका दिया गया जिसके अध्यक्ष पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे और सचिव ज्योति धुर्वे थी.

योजना के तहत डिंडोरी जिले में कई एंबुलेंस इनकी समिति द्वारा मुहैया कराई गई और इसकी एवज में जो बिल लगाए गए उससे जमकर काली कमाई अर्जित की गई है. याचिकाकर्ता के मुताबिक इस मामले में जब जांच बिठाई गई तो पता चला कि एंबुलेंस के नाम पर ट्रक, फायर ब्रिगेड, स्कूल बस और ट्रैक्टर के नंबर देकर लाखों का भुगतान ले लिया गया था. इस मामले में 2013 में डिंडोरी में पदस्थ रहे तत्कालीन कलेक्टर और 2016 में तत्कालीन कलेक्टर रही  छवि भारद्वाज ने नोटशीट चलाते हुए रिकवरी समेत अन्य आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी दिए थे, लेकिन 2016 के बाद यह फाइल बंद पड़ी हुई है. जनहित याचिका की प्राथमिक सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि वह इसमें जवाब मुहैया कराएं.
Published by:Sumit Pandey
First published: