भोपाल गैस त्रासदी : तत्कालीन कलेक्टर और एसपी के ख़िलाफ बंद होगा केस

भोपाल गैस त्रासदी (फाइल फोटो)
भोपाल गैस त्रासदी (फाइल फोटो)

गैस त्रासदी के 34 साल होने को है. यूनियन कार्बाइड की भोपाल स्थित फैक्ट्री से रिसी ज़हरीली गैस ने हज़ारों-हज़ार लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी.

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भोपाल गैस त्रासदी के दौरान तत्कालीन कलेक्टर रहे मोती सिंह और एस पी स्वराज पुरी को जबलपुर हाईकोर्ट ने राहत दी है. हाईकोर्ट ने दोनों के ख़िलाफ भोपाल ज़िला अदालत में चल रहे आपराधिक मामले बंद करने का आदेश दिया है. दोनों अफसरों के ख़िलाफ यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चीफ वॉरेन एंडरसन को भागने में मदद करने का आरोप था.

2 और 3 दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात भोपाल में घटी भीषण गैस त्रासदी के दौरान मोती सिंह कलेक्टर और स्वराज पुरी एसपी थे. यूनियन कार्बाइड से रिसी 'मिक' गैस के कारण हज़ारों लोगों की मौत हो गयी थी. हादसे के बाद यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चीफ वॉरेन एंडरसन भोपाल आया था. मौके का मुआयना कर वो आनन-फानन में यहां से रवाना भी हो गया था. एंडरसन को भगाने में मदद करने का आरोप इन दोनों तत्कालीन अफसरों कलेक्टर मोती सिंह और एसपी स्वराज पुरी पर भी लगा था. इन दोनों अफसरों के ख़िलाफ आपराधिक केस दर्ज हुआ.

मोती सिंह और स्वराज पुरी के ख़िलाफ भोपाल ज़िला अदालत में कंप्लेंट केस दर्ज हुआ था. उनके ख़िलाफ धारा 212, 217 और 221 के तहत परिवाद दर्ज हुआ था. भोपाल ज़िला अदालत की कार्यवाही को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी. याचिका में दलील दी गयी थी कि इस मामले में 26 साल बाद संज्ञान लिया गया. जबकि कानून के मुताबिक घटना के तीन साल के भीतर कार्यवाही की जाना चाहिए थी. ये भी कहा गया कि शिकायत निराधार और सिर्फ मैगज़ीन, मीडिया और किताबों में छपी कहानी के आधार पर की गयी थी.



भोपाल में घटी सदी की उस भीषण त्रासदी में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 3828 लोगों की मौत और 18,922 लोग जीवन भर के लिए बीमार हो गए. इनके अलावा 7172 लोग निशक्त हो गए थे (जबलपुर से प्रतीक मोहन अवस्थी की रिपोर्ट)
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