भोपाल गैस त्रासदीः पुनर्वास और बेहतर इलाज को भटक रहे 6 लाख पीड़ित, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से मांगे सुझाव
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भोपाल गैस त्रासदीः पुनर्वास और बेहतर इलाज को भटक रहे 6 लाख पीड़ित, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से मांगे सुझाव
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भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के 21 साल बीतने के बाद भी 6 लाख पीड़ितों के पुनर्वास (Victims Rehabilitation) और उनके इलाज की सुविधाओं का नहीं है इंतजाम. जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने केंद्र (Central Government) और राज्य सरकार (Kamalnath Government) से इस बारे में बेहतर सुझाव मांगा है.

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जबलपुर. भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के पीड़ितों के पुनर्वास (Victims Rehabilitation) के लिए अब भी सरकारी इंतजाम पुख्ता नहीं हो सके हैं. पूरे मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) में दायर याचिकाओं के लिए गठित मॉनिटिरिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट फिर पेश की है. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि मॉनिटरिंग कमेटी के सचिव का पद खाली हो गया है. इस पर हाईकोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी में सचिव के खाली पद को जल्द से जल्द भरने का निर्देश दिया. साथ ही गैस त्रासदी के पीड़ितों के बेहतर इलाज की सुविधाओं को लेकर केंद्र (Central Government) और राज्य सरकार (Kamalnath Government) से सुझाव मांगा है. अदालत ने इस संबंध में याचिकाकर्ताओं को भी सुझाव देने को कहा है. इस मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी.

2012 से चल रही है सुनवाई
भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन समिति समेत कई याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं, जिन पर साल 2012 से लगातार सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया था. यह कमेटी त्रासदी से पीड़ित लोगों की रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपती है. लेकिन अक्टूबर में कमेटी के सचिव का पद खाली हो गया था. इसे अब तक नहीं भरा गया है. मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में कहा कि पीड़ित लोगों को आज भी उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है. क्योंकि जिन अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, वहां न तो पर्याप्त स्टाफ हैं और न सुविधाएं. ऐसे में पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है.

अब तक 6 लाख पीडित आ चुके सामने
आपको बता दें कि साल 1998 में भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके बाद ही मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया था. यही कमेटी अब पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम कर रही है. वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को मध्य प्रदेश की अदालत (जबलपुर हाईकोर्ट) में भेज दिया था. याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकील राजेश चांद ने बताया कि भले ही मॉनिटरिंग कमेटी के गठन हुए सालों बीत गए, लेकिन व्यवस्थाएं आज भी ठीक नहीं हो पाई हैं. उन्होंने बताया कि पुनर्वास को लेकर अब तक 6 लाख प्रभावितों के नाम सामने आ चुके हैं.



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