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लैपर्ड स्टेट मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा हो रहा है तेंदूए का शिकार, देश में सबसे अव्वल

2019 में एपी में 494 तेंदुओं का शिकार किया गया.

2019 में एपी में 494 तेंदुओं का शिकार किया गया.

रणथम्भौर की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश और राजस्थान में तेंदुओं का सर्वाधिक शिकार किया जाता है. 2014 में 331, 2015 में 341, 2016 में 440, 2017 में 431, 2018 में 460 तो 2019 में 494 तेंदुओं का शिकार किया गया.

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जबलपुर. टाइगर (Tiger) के बाद लैपर्ड स्टेट बने मध्यप्रदेश में अब जानवरों की जनसंख्या बढ़ने के कारण उनकी सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गयी है. जितनी तेज़ी से इनकी आबादी बढ़ी उतनी ही तेज़ी से शिकार (hunt) भी बढ़ रहा है. हालात ये हैं कि तेंदुए के शिकार के मामले में मध्य प्रदेश देश में नंबर वन है.

तेंदुआ और बाघों की संख्या के बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश तेंदुए के शिकार के मामले में देश में सबसे आगे है.

200 तेंदुओं का शिकार
रणथम्बोर नेशनल पार्क की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक देश में पिछले 5 साल में लगभग 2000 तेंदुओं का शिकार किया गया है. वहीं सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ स्टडीज की रिपोर्ट भी कहती है कि पिछले कुछ साल में तेंदुओं की आबादी में 70 से 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. वन विभाग मध्य प्रदेश से आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में मध्यप्रदेश में 405 तेंदुओं की मौत हुई है. इनमें से 200 तेंदुओं का अवैध शिकार किया गया है. मध्यप्रदेश में वन मंडलों और राष्ट्रीय उद्यानों में लगातार तेंदुओं की मौत हो रही है.
 आंकड़ों पर नजर डालें तो


-पन्ना टाइगर रिजर्व में 21
-कान्हा टाइगर रिजर्व में 15
-पेंज टाइगर रिजर्व में 13
-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 12
-सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 10
-बालाघाट वन मंडल मे सर्वाधिक 20 समेत छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी समेत अन्य वन मंडलों में भी तेंदुओं की मौत हुई हैं.

ठोस उपाय की ज़रूरत
रणथम्भौर की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश और राजस्थान में तेंदुओं का सर्वाधिक शिकार किया जाता है. 2014 में 331, 2015 में 341, 2016 में 440,  2017 में 431, 2018 में 460 तो 2019 में 494 तेंदुओं का शिकार किया गया. सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शर्मा का कहना है कि मध्यप्रदेश में तेंदुए के शिकार को रोकने के लिए सरकार ने अब तक कोई भी ठोस कार्य योजना नहीं बनाई है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश में शिकारी बेखौफ होकर तेंदुओं का शिकार कर रहे हैं. शर्मा की मांग है कि मध्य प्रदेश में जल्द ही सरकार तेंदुओं के अवैध शिकार को रोकने और उनके संरक्षण के लिए ठोस उपाय करे.
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