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बक्सवाहा में हीरा खदान का मतलब हम सभी को खतरा, जानिए NGT के दरवाजे किसने और क्यों खटखटाए

मप्र के बक्सवाहा इलाके में हीरा खदान का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पहुंच गया है. इसके खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

मप्र के बक्सवाहा इलाके में हीरा खदान का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पहुंच गया है. इसके खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का बक्सवाहा इलाका. यह हीरा खदानों के लिए मशहूर है. अब यहां सरकार ने फिर एक हीरे की खदान प्रा ...अधिक पढ़ें

जबलपुर. छतरपुर जिले के बक्सवाहा में वन क्षेत्र की करीब 364 हेक्टेयर भूमि पर हीरा खदान की अनुमति का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भोपाल पहुंच चुका है. जबलपुर  निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे ने यह जनहित याचिका दायर की है. याचिका में हीरा खदान के नाम पर जारी की गई अनुमति को निरस्त करने की मांग की गई है.

जानकारी के मुताबिक छतरपुर जिले के बक्सवाहा में सोगोरिया गांव के अंतर्गत 364 हेक्टेयर जंगल के इलाके में हीरा खदान के लिए एक निजी कंपनी को अनुमति दी गई है. याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे के मुताबिक सरकार द्वारा 364 हेक्टेयर जमीन पर दी गई हीरा खदान की अनुमति कई मायनों में गलत है.

सुप्रीम कोर्ट और एजीटी के आदेश नहीं माने

डॉ. नाजपांडे ने कहा कि सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट और NGT द्वारा स्टेनेबल डेवलपमेंट के आदेशों की अनदेखी अनुमति में की गई है. NGT ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट दर्शाया गया है कि जितनी भी वन भूमि को डायवर्ट किया जाता है, उसके दुगने वन क्षेत्र पर कंपनसेटरी फॉरेस्टेशन अनिवार्य है. लेकिन, इस बात की भी अनदेखी छतरपुर कलेक्टर ने कर दी.

हर तरह से गलत – डॉ. नाजपांडे

डॉ. नाजपांडे ने कहा कि हीरा खदान से वहां रहने वाले करीब 8000 वनवासियों पर भी असर पड़ेगा. इनके लिए किसी तरह की योजना सरकार ने नहीं बनाई है. यहां तक कि बड़ा वाइल्डलाइफ डिसबैलेंस भी बन सकता है, जिससे कहीं न कहीं इकोलॉजी प्रभावित होगी. बड़ी बात यह भी है कि खदान के बनने से वन भूमि के जल स्त्रोतों को बड़ा नुकसान भी पहुंचेगा. तमाम दलीलों को याचिकाकर्ता ने अपने जनहित याचिका में प्रदर्शित किया है. इस पर आने वाले सप्ताह में सुनवाई हो सकती है.

इधर, इसका भी विरोध शुरू

जबलपुर में बक्स्वाहा जैसे आंदोलन की तैयारी हो रही है. विरोध हो रहा है जबलपुर के डुमना में बनने वाली स्पोर्ट सिटी का. एक तरफ पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस सिटी की वजह से हजारों पेड़ कटेंगे. वहीं, सांसद राकेश चौधरी का कहना है कि ये प्रोजेक्ट उस जगह से बहुत दूर है, जिसे लेकर विरोध किया जा रहा है. स्पोर्ट सिटी से जबलपुर के पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा.

बता दें, सबसे लंबे फ्लाईओवर और सबसे लंबी रिंगरोड के बाद जबलपुर को प्रदेश की पहली स्पोर्ट सिटी की सौगात मिलने जा रही है. केन्द्र सरकार के सहयोग से जबलपुर के डुमना के पास 40 एकड़ जमीन पर स्पोर्ट सिटी बनाने की योजना को मंजूरी मिल गई है. जबलपुर में बनने जा रही प्रदेश की पहली स्पोर्ट सिटी को करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा. इस स्पोर्ट सिटी में जिसमें क्रिकेट और हॉकी स्टेडियम सहित कई खेल गतिविधियों और स्पोर्ट्स ऐकेडमी की भी सुविधा होगी.

Tags: MP big news

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