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पुलिस लाइन में 15 साल से अवैध कब्‍जा जमा कर रह रहा था आरक्षक, SP के निर्देश पर हुआ ये एक्‍शन

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 17, 2019, 4:04 PM IST
पुलिस लाइन में 15 साल से अवैध कब्‍जा जमा कर रह रहा था आरक्षक, SP के निर्देश पर हुआ ये एक्‍शन
15 सालों से कब्ज़ा जमा कर रह रहा था पुलिस आरक्षक.

पुलिस अधीक्षक अमित सिंह (SP Amit Singh) के निर्देश पर पुलिस लाइन में विगत 15 सालों से कब्ज़ा जमाकर रह रहे बर्खास्त आरक्षक किशन लाल (Constable Kishan Lal) को जबलपुर पुलिस लाइन से बाहर कर दिया गया है. हालांकि आरक्षक अब धरने पर बैठ गया है.

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जबलपुर. पुलिस लाइन में विगत 15 सालों से कब्ज़ा जमाए एक पुलिस आरक्षक को एसपी के निर्देश पर बोरिया बिस्तर समेत परिसर से बाहर कर दिया गया. 2005 में बर्खास्त हुए आरक्षक किशन लाल (Constable Kishan Lal) अवैध ढ़ंग से जबलपुर पुलिस लाइन (Jabalpur Police Line) की जमीन पर कब्ज़ा जमाकर रह रहे थे. हालांकि पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई से खफा होकर बर्खास्त आरक्षक मालगोदाम चौक पर परिवार समेत धरने पर बैठ गया. यह पूरी कवायद पुलिस अधीक्षक अमित सिंह (SP Amit Singh) के निर्देश पर हुई है.

कभी किशन लाल संभालते थे कानून का जिम्‍मा
सड़क किनारे परिवार समेत बोरिया बिस्तर लेकर धरना देने वाले किशन लाल एक वक्त कानून की रक्षा का ज़िम्मा संभालते थे, लेकिन आज खुद कानून तोड़कर इस स्थिति में पहुंच गए हैं. बर्खास्त आरक्षक आज बेघर हो गए हैं. जी हां, उनके आशियाने को खुद उनके ही महकमे के मुखिया के निर्देश पर तोड़ा गया है.

दरअसल, जिस आशियाने में बर्खास्त आरक्षक अपने परिवार समेत रहता था वो अवैध था और पुलिस की ज़मीन पर कब्ज़ा जमाकर किशन लाल निवास कर रहे थे. उनके मुताबिक 2005 में वह जबलपुर के कंट्रोल रूम में पदस्थ थे, तब उनका तबादला जीआरपी जबलपुर कर दिया गया. हालांकि पद रिक्त न होने की वजह से वह जीआरपी में अपनी आमद नहीं दे सके. जबकि लंबी प्रक्रिया और विवाद के चलते उसे निलंबित कर दिया गया और फिर बर्खास्त. जबकि आज तक उन्हें अपने फंड का पैसा नहीं मिला है और अब उनका आशियाना भी छीन लिया गया है.

पुलिस अधीक्षक ये बोले
पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक अमित सिंह का कहना है कि बर्खास्त आरक्षक लंबे समय से अवैध ढ़ंग से कब्ज़ा जमाए पुलिस लाइन में रह रहा था. बार-बार उसे नोटिस दिए गए लेकिन वह नहीं हटा. पूर्व में जब भी किशनलाल का हटाने की कोशिश की गई तो उसके द्वारा फांसी लगाने की धमकी दी गई.
बहरहाल, पुलिस ने बर्खास्त आरक्षक किशललाल के आवास को तो ध्वस्त कर दिया है, लेकिन इसी कार्रवाई की तलवार अब उन पर भी चलनी चाहिए जो किशनलाल की तरह ही पुलिस लाइन के आवसों में सालों से कब्ज़ा जमाए हैं. हैरानी की बात है कि कई जिला तो छोड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सालों पुलिस क्वाटर में काबिज़ हैं.
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First published: October 17, 2019, 4:04 PM IST
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