डॉ. आत्महत्या केस: 5 सीनियर डॉक्टर्स के खिलाफ FIR दर्ज, रैगिंग के नाम पर जातीय उत्पीड़न करने का आरोप

(सांकेतिक तस्वीर)
(सांकेतिक तस्वीर)

एक अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर तीन में डॉ. भागवत देवांगन का शव बरामद किया गया था. मृतक डॉक्टर छत्तीसगढ़ के जांजगीर राहौद नगर पंचायत का रहने वाला था.

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  • Last Updated: November 4, 2020, 10:10 AM IST
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जबलपुर. डॉक्टर भागवत देवांगन सुसाइड केस (Dr. Bhagwat Devangan Suicide) में अब मेडिकल के पांच सीनियर छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इन पांचों सीनियर डॉक्टर्स के खिलाफ डॉ. भागवत के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी.  जिसमें उन्होंने रैंगिग और प्रताड़ित करने के आरोप लगाये थे. जानकारी के मुताबिक मेडिकल में आर्थो से पीजी कर रहे डॉक्टर्स विकास द्विवेदी, अमन गौतम, सलमान,शुभम शिंदे और अभिषेक गेमे पर मामला दर्ज कर लिया गया है.

बता दें कि मृतक भागवत देवांगन के परिजनों ने उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया था. परिजनों का कहना है कि देवांगन के साथ कॉलेज के लोग जातीय भेदभाव (Racial Discrimination) करते थे. कॉलेजन के सीनियर्स (Seniors) छोटी जाति का हवाला देकर उसे प्रताड़ित करते थे. यही वजह है कि उसने अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार से तंग आकर आत्महत्या कर ली. हालांकि, मेडिकल कॉलेज का प्रशासन इस बात से इनकार कर रहा है कि भागवत देवांगन के साथ जातीय भेद-भाव होता था.

रैगिंग से तंग आकर की आत्महत्या

दरअसल, बीते दिनों जबलपुर में एक खबर सामने आई थी कि रैगिंग से तंग आकर एक डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली. एक अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर तीन में डॉ. भागवत देवांगन का शव बरामद किया गया था. मृतक डॉक्टर छत्तीसगढ़ के जांजगीर राहौद नगर पंचायत का रहने वाला था. जबलपुर पहुंचे परिजनों ने पुलिस से जो शिकायत की उसके बाद जांच अधिकारियों के होश उड़ गए. दरअसल, यह मामला रैगिंग से जुड़ा हुआ सामने आया था.



 24 जुलाई को भी रैगिंग से तंग आकर आत्महत्या का प्रयास किया था

परिजनों ने पुलिस को बताया था कि डॉक्टर देवांगन ने बीते 24 जुलाई को भी रैगिंग से तंग आकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद पांच डॉक्टर्स के नाम सामने आए थे. कॉलेज प्रबंधन ने उन पांचों डॉक्टर्स पर कोई कार्रवाई नहीं की. एक बार फिर जब वह अपने घर से वापस पढ़ाई के लिए हॉस्टल पहुंचा तो उसके साथ फिर रैगिंग शुरू कर दी गई, जिससे तंग आकर उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. परिजनों का आरोप था कि उसके साथ सीनियर्स जातीय भेदभाव करते हैं. बयान के आधार पर पुलिस मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी, कॉलेज के डीन सहित साथी जूनियर और सीनियर डॉक्टर से पूछताछ कर मामले की छानबीन में जुट गई.
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