जबलपुर: हर वर्ग को मतदान केंद्र पहुंचाने की कोशिशों में जुटा चुनाव आयोग

जबलपुर जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में करीब 20 हजार से ज्यादा दिव्यांग मतदाता है, जिन्हें बाधारहित मतदान का वातावरण प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी की है. जिला निर्वाचन आयोग ने महिलाओं के लिए पिंक बूथ और युवाओं के लिए सेल्फी कैंपस की थीम तैयार की है.

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 16, 2018, 8:41 AM IST
जबलपुर: हर वर्ग को मतदान केंद्र पहुंचाने की कोशिशों में जुटा चुनाव आयोग
जबलपुर जिला कलेक्टर छवि भारद्वाज
Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 16, 2018, 8:41 AM IST
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में सुगम मतदान की थीम पर चल रहा निर्वाचन आयोग हर वर्ग के मतदाता को मतदान के लिए करने का काम कर रहा है. यह पहली बार होगा जब दिव्यांग मतदाताओं की भी फ्लैगिंग का काम किया गया है. जबलपुर जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में करीब 20 हजार से ज्यादा दिव्यांग मतदाता है, जिन्हें बाधारहित मतदान का वातावरण प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी की है. जिला निर्वाचन आयोग ने महिलाओं के लिए पिंक बूथ और युवाओं के लिए सेल्फी कैंपस की थीम तैयार की है.

आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक मतदान कराने के उद्देश्य से जिला निर्वाचन आयोग हर वर्ग के मतदाता तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रह है. जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर छवि भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश में यह पहली बार होगा जब दिव्यांग मतदाताओं की फ्लैगिंग का काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि प्रत्येक बूथ पर दिव्यांगों के लिए अलग से मतदान केंद्र होगा, जिससे दृष्टीबाधित और श्रवणबाधित अपने साथ एक सहायक को रख सकेंगे. ऐसे सहायकों की नियुक्ति शपथ पत्र के आधार पर की जाएगी. दिव्यांगों को मतदान केंद्र तक ले जाने के लिए ऑनलाइन वाहन की सुविधा भी दी जाएगी.

जिला निर्वाचन अधिकारी छवि भारद्वाज ने बताया कि ना केवल दिव्यांग बल्कि ऐसे बूथ जहां महिला मतदाताओं का अनुपात पुरूष मतदाताओं से ज्यादा होगा, उन बूथों को पिंक बूथ के रूप में बदला जाएगा. इन बूथों पर महिला कर्मचारियों को ही तैनात किया जाएगा, जबकि सबसे ज्यादा युवा मतदाताओं वाले बूथों को सेल्फी कैंपस के रूप में बदला जाएगा.

प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है, ऐसे में प्रशासनिक अमला भी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है. निर्वाचन आयोग की तैयारियों को देख अन्य जिले भी ऐसी योजनाओं को लागू कर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अपने-अपने ढंग के काम कर रह हैं.
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