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करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी छुक-छुक गाड़ी में सफर करने को मजबूर हैं यात्री, 7 साल से अटका हुआ है काम

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 30, 2019, 7:47 PM IST
करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी छुक-छुक गाड़ी में सफर करने को मजबूर हैं यात्री, 7 साल से अटका हुआ है काम
कटनी और सतना के बीच दो इंजन लगाकर चलती है रेलगाड़ी.

पश्चिम मध्य रेलवे (West Central Railway) में बीते 7 सालों से चल रहे विद्युतीकरण (Electrification) के काम के बावजूद कटनी से सतना (Katni-Satna) के बीच आज भी रेलगाड़ियां डीजल इंजन के सहारे दौड़ रही हैं.

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जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे (West Central Railway) में बीते 7 सालों से चल रहे विद्युतीकरण (Electrification)के काम के बावजूद तारों में करंट दौड़ नहीं पा रहा है. आलम यह है कि जोन के सबसे व्यस्त रूट कहे जाने वाले कटनी से सतना (Katni-Satna) के बीच आज भी रेलगाड़ियां डीजल इंजन के सहारे दौड़ रही हैं. खास बात यह है कि इस ट्रैक पर रेलगाड़ी एक नहीं बल्कि दो इंजनों के सहारे दौड़ती है, जिसमें इलेक्ट्रिक और डीजल दोनों इंजन शामिल होते हैं. यकीनन इन डीजल इंजनों में हर महीने करोड़ों का डीजल बर्बाद हो रहा है.

रेलवे की ये थी योजना
ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन के कार्य पर करोड़ों फूंक चुका है. लंबे अरसे से विद्युतीकरण का काम चल रहा है, लेकिन काम की रफ्तार इतनी सुस्त है कि आधा अधूरा काम ही अब तक हो सका है. जबकि कटनी से सतना के बीच हुआ इलेक्ट्रिफिकेशन का काम आज भी अधर पर लटका हुआ है. पश्चिम मध्य रेलवे ने इटारसी से इलाहाबाद तक रेल विद्युतीकरण की योजना बनाई थी जिस पर करीब 800 करोड़ रुपए रेलवे को मिले थे. आलम यह है कि जबलपुर से इटारसी और जबलपुर से कटनी के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन काम तो पूरा हो गया है, लेकिन कटनी सतना के बीच आज भी रेलगाड़ियां डीजल इंजनों के सहारे दौड़ाई जा रही हैं.

भ्रष्‍टाचार के बाद रेलवे ने उठाय ये कदम

गौरतलब है कि कटनी सतना के बीच जिस कंपनी द्वारा काम किया जा रहा था उसकी अनियमितताओं को सीबीआई ने पकड़ा था. भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद रेलवे ने दिल्ली की कोबरा कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया, जिसके बाद से काम आज तक अधूरा पड़ा हुआ है. जब भी कोई यात्री जबलपुर से रीवा या फिर इलाहाबाद की ओर जाता है तो कटनी पहुंचने पर ट्रेन की रफ्तार कम हो जाती है और फिर डीजल इंजनों के सहारे रेलगाड़ी को टांग दिया जाता है.

क्‍या छुक-छुक गाड़ी से मिलेगा छुटकारा?
एक ओर रेल महकमा हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाने के सपने देख और दिखा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर पश्चिम मध्य रेलवे विद्युतीकरण के नाम पर ढीले रवैये में काम कर रहा है. इससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाई स्पीड तो दूर जनता को अब भी छुक छुक गाड़ी ही इस ट्रैक पर नसीब होगी.
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First published: October 30, 2019, 7:36 PM IST
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