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बिजली घाटे पर बोले MP के ऊर्जा मंत्री-देश की हर विद्युत कंपनी नुक़सान में है

देश की हर विद्युत कंपनी नुक़सान में है-प्रियव्रत सिंह

देश की हर विद्युत कंपनी नुक़सान में है-प्रियव्रत सिंह

मध्य प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों (Power distribution company) ने भारी भरकम घाटा दिखाते हुए विद्युत नियामक आयोग ( Regulatory commission) के पास 4 याचिका लगायी हैं. इनमें 24,888 करोड़ रुपए का भारी भरकम घाटा बताया है.

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जबलपुर.पूरे भारत में ऐसी कोई विद्युत वितरण कंपनी (Power distribution company) नहीं है जो घाटे में ना हो. ये कहना है प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह (priyavrat singh) का. दौरे पर जबलपुर पहुंचे मंत्री ने नियामक आयोग में दायर विद्युत वितरण कंपनियों की याचिका पर भी सफाई दी. उनका कहना है, नियामक आयोग में याचिका दायर करना एक नियमित प्रक्रिया है.

भाजपा ज़िम्मेदार
ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह मध्य प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनियों की वर्तमान वित्तीय स्थिति के लिए पूर्व की बीजेपी सरकार को ज़िम्मेदार मानते हैं.उन्होंने कहा सभी वितरण कंपनियां 2004 में जीरो बैलेंस के साथ शुरू हुई थीं. भाजपा शासन में 2004 से लेकर 2018 तक करीब 27 प्रतिशत बिजली महंगी की गयी. भले ही वितरण कंपनियों ने 4 वित्तीय वर्षो में घाटा दर्शाया हो लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये घाटा पूरा करने के लिए बिजली महंगी की जाए.

नियामक आयोग में याचिका
मध्य प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों ने भारी भरकम घाटा दिखाते हुए विद्युत नियामक आयोग के पास 4 याचिका लगायी हैं. इनमें 24,888 करोड़ रुपए का भारी भरकम घाटा बताया है. यह घाटा पिछले लगातार 4 साल का है. इन याचिकाओं में साल 2014 से लेकर 2018 तक का जिक्र है. ये चारों याचिकाएं पिछले एक साल में अलग-अलग दायर की गयी हैं.

करोड़ों में है घाटा
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16,2016-2017 और 2017-18 की याचिकाएं लगाई गई हैं. इसमें मध्य क्षेत्र, पूर्व, मध्य और पश्चिम विद्युत वितरण कंपनी शामिल हैं. दरअसल कंपनियां प्रस्तावित आंकलन के बाद अंतिम आय और व्यय का ब्यौरा तैयार करती है. इसमें नुक़सान होने पर कंपनी आगामी वर्षों में इसकी भरपाई के लिए विद्युत नियामक आयोग के पास याचिकाएं दायर करती है.

आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2014-15 में 5156.88 करोड़ रुपए, 2015-16 में 7156.94, 2016-17 में 7247.55 और 2017-18 में 5327.54 करोड़ रुपए का घाटा कंपनियों को हुआ है.

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