भोपाल गैस त्रासदी: पीड़ितों के वकील की जुबानी, सुनिए केस की दास्तां
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भोपाल गैस त्रासदी: पीड़ितों के वकील की जुबानी, सुनिए केस की दास्तां
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पक्ष रख रहे अधिवक्ता राजेश चंद

Bhopal Gas Tragedy: न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए गैस पीड़ितों की ओर से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में पक्ष रख रहे अधिवक्ता राजेश चंद ने पीड़ितों के लिए सरकारी व्यवस्था का खाका बताया

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34 साल पहले भोपाल गैस त्रासदी को दुनिया की बड़ी मानव जनित त्रासदी भी कहा जाता है. 2 से 3 दिसम्बर 1984 की रात भोपाल की सड़को पर मौत ने तांडव मचाया था. यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से हुए गैस रिसाव ने हजारों लोगों की ज़िंदगी छीन ली थी. इस भयावह कांड को 34 साल तो बीत गए लेकिन आज भी इसके जख्म ताज़ा हैं या फिर यूं कहें कि सरकारी तंत्र इन घावों को सूखने ही नही देता.

जिन लाखों परिवारों ने अपनों को खोया और जो कई गंभीर बीमारियों का शिकार हुए उन्हें आज तक समुचित इलाज भी मुहैया नही कराया जा सका है. न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए गैस पीड़ितों की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पक्ष रख रहे अधिवक्ता राजेश चंद ने पीड़ितों के लिए सरकारी व्यवस्था का खाका बताया.

आरोप है कि न्यायालय में प्रस्तुत सरकार का जवाब बतलाता है कि अब तक पीड़ितों के समुचित इलाज के लिए चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी नही हो सकी है. बीती सुनवाई तक 220 से अधिक चिकित्सकों की नियुक्ति का काम भी सरकार पूरा न कर सकी है. यहां तक तो ठीक मान लें लेकिन इलाज में लगने वाली सभी दवाएं भी नही मिल पा रही हैं.



गौरतलब है कि 1998 में इस कांड में पीड़ित लोगो के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. 2012 तक सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई चली. तमाम मापदंड भी सहायता के लिए बनाए गए थे और 20 बिन्दुओं पर अमल करने के साथ याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेजी गई. 2012 से 2018 हो गया लेकिन सरकार ना उन 20 बिंदुओं पर अमल नही कर पाई है, न ही पीड़ितो का हेल्थ कार्ड पूरी तरीके से बन पाए हैं.
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