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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुजरात दंगों के सात दोषी जबलपुर पहुंचे, करेंगे सामुदायिक सेवा
Jabalpur News in Hindi

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 12, 2020, 11:57 AM IST
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुजरात दंगों के सात दोषी जबलपुर पहुंचे, करेंगे सामुदायिक सेवा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जबलपुर पहुंचे गुजरात के दोषी. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 के गोधरा कांड (Godhra Incident) के बाद गुजरात में भड़के दंगे (Gujarat Riots) के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 15 दोषियों को सामुदायिक सेवा की शर्त पर जमानत दी है.

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जबलपुर. गुजरात (Gujrat) के गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों के एक मामले के सात दोषी जबलपुर पहुंच गए हैं. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के आदेश के तहत ये सभी अब जबलपुर में रहकर समाजसेवा करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगे के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 17 दोषियों को इस शर्त पर जमानत दी है कि उन्हें मध्य प्रदेश के दो शहरों (इंदौर और जबलपु) में रहकर सामुदायिक (समाज) सेवा करनी होगी. बाकी 10 दोषी पहले ही इंदौर पहुंच चुके हैं. वहां इन दोषियों के साथ हुई बदसलूकी के बाद इनकी पहचान गुप्त रखी जा रही है.

गुजरात के गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों के एक मामले के 7 दोषियों ने जबलपुर पहुंच कर सिविल लाइन्स थाने में अपनी आमद दर्ज करा दी है. ये दोषी एक हफ्ते में 6 घंटे समाजसेवा करेंगे. अदालत ने छह दोषियों का एक समूह को इंदौर, जबकि दूसरे को जबलपुर में रहकर सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरणों से यह भी कहा था कि वे इन दोषियों को उचित रोजगार दिलाने में मदद करें. उसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इस दिशा में काम कर रहा है.

15 दोषियों को दो समूहों में बांटा
इस दंगे में 33 लोगों को जिंदा जला दिया गया था. चीफ जस्टिस एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने इस मामले के 15 दोषियों को दो समूहों में बांट दिया था. जमानत की शर्तों के तहत ये दोषी गुजरात से बाहर रहेंगे और उन्हें मध्य प्रदेश के दो शहरों में रहकर सामुदायिक सेवा करनी होगी. इन सभी दोषियों को नियमित रूप से इन शहरों के संबंधित पुलिस थानों में हाजिरी भी देनी होगी.

सप्ताह में छह घंटे करनी होगी सामुदायिक सेवा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि वे दोषी वहां (इंदौर और जबलपुर में) एक साथ नहीं रहेंगे. उन्हें जमानत की शर्त के अनुसार सप्ताह में छह घंटे सामुदायिक सेवा करनी होगी. इन सभी को अपनी सामुदायिक सेवाओं के बारे में संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रमाणपत्र भी सौंपना होगा. पीठ ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को तीन महीने बाद अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया जिसमें उसे बताना होगा कि दोषियों ने जमानत की शर्तों का पालन किया है या नहीं?

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First published: February 12, 2020, 10:29 AM IST
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