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महापौर अध्यादेश को मंजूरी देकर राज्यपाल ने निभाई अपनी असली भूमिका- कांग्रेस MP विवेक तन्खा

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 8, 2019, 6:59 PM IST
महापौर अध्यादेश को मंजूरी देकर राज्यपाल ने निभाई अपनी असली भूमिका- कांग्रेस MP विवेक तन्खा
मुझे बुरा लगा कि राज्‍यपाल को मेरे टवीट् का बुरा लगा-राज्यसभा सांसद

नगरीय निकाय चुनाव के संशोधन विधेयक को विजयादशमी के दिन राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji Tandon) ने मंजूरी दे दी. इसके साथ ही महापौर अध्‍यादेश (Mayor Ordinance) को लेकर राजभवन और कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) के बीच चल रहा विवाद खत्‍म हो गया है.

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जबलपुर. एक टवीट् से शुरू हुआ महापौर अध्‍यादेश (Mayor Ordinance) का विवाद आखिर खत्म हो गया. नगरीय निकाय एक्ट में संशोधन विधेयक को विजयादशमी के दिन राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji Tandon) ने मंजूरी दे दी, जिससे राजभवन और सरकार के बीच चल रहे विवाद पर विराम लग गया है. जबकि इस मामले में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा (Rajya Sabha MP Vivek Tankha) ने राज्यपाल का आभार जताया है.

अब होगा ये काम
नगरीय निकय चुनाव के संशोधन विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही अब प्रदेश में अप्रत्यक्ष तौर पर महापौर और निकाय के अध्यक्ष का चयन होगा. मामले मेे न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं. तन्खा के मुताबिक राज्यपाल ने विधेयक को मंजूरी देते हुए एक राज्यपाल की भूमिका निभाई है और देशभर में उनकी तारीफ हो रही है.

ट्वीट को लेकर तन्‍खा ने कही ये बात

कांग्रेस सांसद तन्खा ने राज्यपाल को उनके ट्वीट से हुई नाराज़गी पर खेद भी जताया है. उन्‍होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनके ट्वीट से किसी को दुख पहुंचा है. जबकि मेरी ऐसी कोई मंशा उनकी नहीं थी.

भाजपा पर लगाए ये आरोप
खास बातचीत में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भाजपा के आरोपों और दलीलों पर निशाना साधा. तन्खा के मुताबिक अप्रत्यक्ष प्रणाली से खरीद फरोख्त को बढ़ावा देने का आरोप लगाने वाली बीजेपी को क्या महाराष्ट्र में खरीद फरोख्त नहीं दिखती. क्या 2014 में राजस्थान में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने महापौर चुनाव को अप्रत्यक्ष प्रणाली में तब्दील किया तब उन्हें खरीद फरोख्त नजर नहीं आई. साथ ही उन्‍होंने आरोप लगाया कि खरीद फरोख्त भाजपा के मन में है. कांग्रेस कभी इस मंशा को नहीं रखती और अपने दम पर चुनाव जीतेगी. जबकि अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू होने से पार्षदों का महत्व अब बढ़ेगा.
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गौतरलब है कि नगरीय निकाय एक्ट में संशोधन को लेकर एक ट्वीट से विवाद शुरू हुआ था, जिसमें राज्यपाल लालजी टंडन ने नाराजगी भी जताई थी. मामला इस कदर आगे बढ़ा था कि खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ को राजयपाल से मुलाकात करने राजभवन जाना पड़ा.

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First published: October 8, 2019, 6:44 PM IST
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