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ALERT: बड़ी कंपनियों के हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से ऐसे ठगी कर रहे हैं साइबर अपराधी

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 16, 2019, 8:47 PM IST
ALERT: बड़ी कंपनियों के हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से ऐसे ठगी कर रहे हैं साइबर अपराधी
साइबर अपराधी रोज़ नए तरीकों से वारदातों को अंजाम दे रहे है

साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) ने जांच एजेन्सियों (Investigation Agencies) की नाक में दम कर दिया है. आए दिन साइबर अपराधों को अंजाम देने के ऐसे नए तरीके सामने आ रहे हैं, जो जांच अफसरों को भी हैरत में डाल देते हैं. ताज़ा मामला जबलपुर का है जहां बड़ी कंपनियों के हेल्पलाइन नंबर अब धोखाधड़ी (Fraud) का नया ज़रिया बन रहे हैं.

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जबलपुर. देश दुनिया में अब ई कॉमर्स (E commerce) का बड़ा बाज़ार स्थापित हो गया है. ऑनलाइन (Online) के ज़माने में अब गैजेटस (Gadegets) या फिर मोबाइल (Mobile) या लैपटाप (Laptop) से एक क्लिक पर बड़े से बड़ा सामान खरीदने और उसके भुगतान की सुविधा मुमकिन है. लाज़मी है कि जब खरीदी ऑनलाइन होगी तो ई व्यापार में सुविधाओं की कमी आने पर आप शिकायत भी ऑनलाइन ही करेंगे. कस्टमर केयर या फिर हेल्पलाइन नंबरों के आधार पर कोई भी कस्टमर अपनी शिकायत दर्ज कराएगा, लेकिन हाईटेक ज़माने के हाईटेक ठगों ने ठगी के लिए हेल्पलाइन नंबरों को भी नहीं छोड़ा है. अगर आप भी किसी शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो ज़रा सावधान रहें. ज़रूरी नहीं कि किसी बड़ी कंपनी का हेल्पलाइन नंबर जो आपको गूगल सर्च में दिख रहा है वो सही हो.

ऐसे होती है हेल्पलाइन नंबरों से ठगी
हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से फ्रॉड करने का तरीका विश्वास को दांव पर रखकर किया जाता है. कोई भी उपभोक्ता कंपनी के ऑथोराइज़्ड हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल कर उसपर अपना विश्वास जताता है लेकिन यही हेल्पलाइन नंबर अब उन हाथों मे आ गए हैं जो मदद के नाम पर आपको और भी तकलीफ दे देते हैं. आमतौर पर साइबर सेल के पास पहुंची शिकायतों में पाया गया कि कम्पलेंट रजिस्टर करने के लिए किसी लिंक को भेजकर उसे मोबाइल मे सेव करने की बात कही जाती है, जबकि वो लिंक एक रिमोट शेयरिंग एप होता है.

सावधानी ही सुरक्षा है

साइबर सेल एसपी अंकित शुक्ला ने न्यूज़ 18 से खास बातचीत में बताया कि जैसे ही कोई उस लिंक को डाउनलोड़ करता है, मोबाइल में होने वाली हर गतिविधि फ्रॉडस्टर को दिखने लगती है. फिर हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 10 रूपए की मांग की जाती है, जिसका कोई भी उपभोक्ता अपने यूपीआई नंबर के आधार पर भुगतान करता है. यहीं से ठगी होती है और लोग परेशान होते हैं. हालांकि इस खबर का आशय ये नहीं है कि हर कंपनी का हेल्पलाइन नंबर गलत हो सकता है लेकिन सावधानी रखना आवश्यक है, क्योंकि सावधानी ही बचाव है.

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First published: November 16, 2019, 8:45 PM IST
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