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पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित करने पर शिवराज सरकार को नोटिस

मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जरिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उम्र भर के लिए सरकारी बंगले आवंटित किए जाने के आदेश पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जरिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उम्र भर के लिए सरकारी बंगले आवंटित किए जाने के आदेश पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जरिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उम्र भर के लिए सरकारी बंगले आवंटित किए जाने के आदेश पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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    मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जरिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उम्र भर के लिए सरकारी बंगले आवंटित किए जाने के आदेश पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

    स्थानीय कानून की विद्यार्थी रौनक यादव की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटन के मामले में पारित आदेश पर अमल के संबंध में जवाब मांगा है.

    युगलपीठ ने यह भी कहा है कि उप महाधिवक्ता समदर्शी तिवारी सरकार से इस संबंध में निर्देश प्राप्त कर न्यायालय को अवगत करवाए. इसके बाद याचिका में अनावेदक बनाए गए तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों उमा भारती, दिग्विजय सिंह और कैलाश जोशी को नोटिस जारी करने पर विचार किया जाएगा.

    दरअसल, रौनक यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित किए जाने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी. याचिका में राज्य सरकार सहित पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, दिग्विजय सिंह और कैलाश जोशी को अनावेदक बनाया गया था. उमा भारती वर्तमान में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री है.

    याचिकाकर्ता की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश सरकार ने 24 अप्रैल 2016 को एक आदेश पारित किया था, जिसके अनुसार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को मंत्रियों के समान वेतन व भत्ते मिलेंगे. इसके अलावा, सरकारी बंगला भी उनके नाम ताउम्र आवंटित रहेगा.

    याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उक्त आदेश मध्य प्रदेश मंत्री वेतन व भत्ते अधिनियम 1972 की धारा 5 (।) के प्रावधानों के विपरीत है. अधिनियम के तहत पद मुक्त होने के एक माह के भीतर मुख्यमंत्री व मंत्रियों को सरकारी आवास खाली करना अनिर्वाय है.

    याचिका में यह भी कहा गया था कि जन प्रहरी विरद्ध उत्तरप्रदेश सरकार के मामले में भी उच्चतम न्यायालय ने पद से हटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के नाम सरकारी बंगले के आवंटन व रहवास को गलत बताया है.

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