सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामलों में कैसे हो जल्द सुनवाई? हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

SC ने 16 सितंबर 2020 को देश के सभी राज्यों के चीफ जस्टिस को निर्देश जारी किए थे.
SC ने 16 सितंबर 2020 को देश के सभी राज्यों के चीफ जस्टिस को निर्देश जारी किए थे.

सांसदों (MP) और विधायकों (MLA) पर आपराधिक मामलों (Criminal cases) की सुनवाई के लिए सभी राज्यों की राजधानी में विशेष अदालत है. इनमें कई ऐसे मामले हैं जिन पर हाई कोर्ट के रोक लगा रखी है. इसलिए उन पर सुनवाई नहीं हो पा रही है.

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जबलपुर. आपराधिक मामलों (Criminal cases) में आरोपी बने सांसदों (MP) और विधायकों (MLA) पर दर्ज प्रकरणों का तत्काल निपटारा कैसे हो इस सिलसिले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (High Court) ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है.सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर हाई कोर्ट ने खुद ही संज्ञान लेते हुए इस पर सुनवाई शुरू कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई कोर्ट चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करना शुरू कर दिया है. सांसदों और विधायकों के लिए भोपाल में बनी विशेष अदालत में कई माननीयों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबे समय से लंबित चल रहे हैं. ना केवल मध्य प्रदेश बल्कि देशभर के अलग-अलग प्रदेशों में कुछ ऐसा ही हाल है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी किए थे. अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 19 अक्टूबर को नीयत कर दी गई है.

राजधानी में विशेष अदालत
सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए सभी राज्यों की राजधानी में विशेष न्यायालय गठित कर दिया गया है. विशेष न्यायालयों में कई ऐसे मामले लंबित हैं जिस पर हाई कोर्ट के रोक लगाने के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को गंभीरता से लेते हुए 16 सितंबर 2020 को देश के सभी राज्यों के चीफ जस्टिस को निर्देश जारी किए थे.



2 महिने में हो निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में लंबित सांसद और विधायकों के ऐसे आपराधिक मामले जिन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है ऐसे मामलों को सुनवाई के लिए उचित पीठ के समक्ष लगाएं. यदि ऐसे मामलों पर रोक जारी रखना जरूरी है तो तत्कला सुनवाई कर उन मामलों का 2 माह में निपटारा किया जाए.
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