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हाईकोर्ट के आदेश से क्रेशर संचालकों का करोड़ों रुपया डूबा, ये है वजह

Pavan Patel | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 11, 2019, 7:28 PM IST
हाईकोर्ट के आदेश से क्रेशर संचालकों का करोड़ों रुपया डूबा, ये है वजह
गिट्टी खदानों के आवंटन में अब दो नियम होंगे लागू.

इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) के एक निर्देश ने प्रदेश के सैकड़ों क्रेशर संचालकों (Crusher Operators) की सांसें अटका दी हैं. इस वजह से क्रेशर संचालकों का करोड़ों रुपया फंस गया है.

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जबलपुर. मध्य प्रदेश की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) के एक निर्देश ने प्रदेश के सैकड़ों क्रेशर संचालकों (Crusher Operators) की सांसें अटका दी हैं. इंदौर की डबल बेंच ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए गिट्टी खदानों के आवंटन के दो रास्ते बना दिए हैं. एक प्राइवेट खदानों के स्थानीय स्तर पर आवंटन और दूसरा सरकारी खदानों के नीलामी से आवंटन करने का. हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आवेदन देने वाले करीब 50 से अधिक क्रेशर संचालक हैं, जिन्होंने पूर्व के नियमानुसार खदान आवंटन की अपील की थी, लेकिन न्यायालय के आदेश से उन्हें झटका लगा है.

अधिवक्ता शोएब अहमद ने बताया कि पूर्व में कभी ऐसा नहीं हुआ. नियम के अनुसार गिट्टी की खदानों का माइनिंग विभाग (Mining Department) और जिला प्रशासन अपने स्तर पर आवंटित करता रहा है और गिट्टी की खदानें नीलामी के दायरे के बाहर रही हैं.

क्रेशर संचालकों के करोड़ों रुपए फंसे
इस नए आदेश के कारण उन हजारों क्रेशर संचालकों का करोड़ों रुपया फंस गया है जिन्होंने पूर्व में सरकारी खदानें ली थीं और चला रहे थे. इंदौर हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद से उनका लाइसेंस स्वतः निरस्त माना जाएगा और अब नए सिरे से खदानों की नीलामी में उन्हें दोबारा खदान मिलने की गुंजाइश न के बराबर रहेगी. बहरहाल अब सभी खदान मालिक डबल बेंच के आदेश में राहत की उम्मीद लिए ट्रिपल बेंच में अपील करने की तैयारी में हैं.

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First published: November 11, 2019, 7:28 PM IST
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