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भड़काऊ भाषण मामला: कांग्रेस MLA आरिफ मसूद को राहत, HC से मिली अग्रिम ज़मानत

आरिफ मसूद पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.
आरिफ मसूद पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.

भोपाल (Bhopal) के इक़बाल मैदान में भड़काऊ भाषण को लेकर मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए मसूद ने अग्रिम ज़मानत के लिए हाईकोर्ट (HC) की शरण ली थी.

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जबलपुर. भोपाल के कांग्रेस विधायक (Congress MLA) आरिफ़ मसूद को जबलपुर हाईकोर्ट (HC) से बड़ी राहत मिल गयी है. HC ने मसूद को  50 हज़ार के निजी मुचलके पर ज़मानत दे दी है. उन्हें जांच में सहयोग करने और बिना अनुमति भोपाल ना छोड़ने की शर्त पर ज़मानत मिली. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा-निर्वाचित जनप्रतिनिधि के फरार होने की आशंका नहीं है.आरिफ मसूद पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का केस दर्ज है. भोपाल के इक़बाल मैदान में फ़्रांस के ख़िलाफ प्रदर्शन के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया था, उसे भड़काऊ माना गया. उसके बाद मसूद पर गैर ज़मानती धाराओं में केस दर्ज किया गया था.

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को आज जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गयी. हाईकोर्ट ने आरिफ मसूद की अग्रिम ज़मानत मंज़ूर कर ली. मसूद ने आईपीसी सेक्शन 153 ए और कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर सेक्शन 438 के तहत आरोपी बनाए जाने के खिलाफ अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट में दायर की थी. दो दिन पहले 25 नवंबर को जबलपुर हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मसूद की ओर से आज कोर्ट में दलील पेश की गई थी कि पुलिस ने 29 अक्टूबर को कलेक्टर ऑर्डर के उल्लंघन की FIR दर्ज की थी. उसके बाद 4 नवम्बर को सरकार ने जानबूझकर उनके खिलाफ भड़काऊ भाषण की FIR दर्ज करवाई.



सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. सरकार की ओर से कहा गया था कि आरिफ मसूद के ख़िलाफ़ अब तक 29 मामले दर्ज हो चुके हैं. भोपाल में दिए इस भाषण में मसूद ने धार्मिक भावनाएं भड़काईं.

भोपाल के इक़बाल मैदान में भड़काऊ भाषण को लेकर मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए मसूद ने अग्रिम ज़मानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी. पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने केस डायरी तलब की थी. इस पर 25 नवंबर को ऐक्टिंग चीफ़ जस्टिस की डिविजन बेंच ने मामले पर सुनवाई की.

VC के ज़रिए सुनवाई
आरिफ़ मसूद की अग्रिम ज़मानत याचिका पर बुधवार 25 नवंबर को हुई सुनवाई में मसूद की ओर से अधिवक्ता अजय गुप्ता ने पैरवी की थी. पूरी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हुई थी.
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