जबलपुर हाईकोर्ट का केंद्र को निर्देश- मध्य प्रदेश को हर महीने उपलब्ध कराए 1.5 करोड़ वैक्सीन

वर्तमान परिस्थितियों में मध्य प्रदेश को हर माह डेढ़ करोड़ वैक्सीन की आवश्यकता है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Madhya Pradesh News: हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई मे विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं जिसमें जिलेवार ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen Plant) की वर्तमान स्थिति से अवगत कराना होगा. साथ ही राज्य सरकार को हाईकोर्ट में यह जानकारी भी देनी होगी कि राज्य के कितने जिलों में ऑक्सीजन, आईसीयू, वेंटिलेटर बेड और सीटी स्कैन मशीनें लग चुकी हैं

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जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने कोरोना आपदा (Corona Crisis) मामले पर विस्तृत आदेश जारी किया है. कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार (State Government) से प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई मे विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं जिसमें जिलेवार ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen Plant) की वर्तमान स्थिति से अवगत कराना होगा. साथ ही राज्य सरकार को हाईकोर्ट में यह जानकारी भी देनी होगी कि राज्य के कितने जिलों में ऑक्सीजन, आईसीयू, वेंटिलेटर बेड और सीटी स्कैन मशीनें लग चुकी हैं.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में सरकार की ओर से वैक्सीनेशन पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश को मई माह मे 35 लाख, जून माह में 54 लाख और 19 जुलाई तक कुल 60 लाख वैक्सीन मिल चुकी है. इस तरह से राज्य को अब तक एक करोड़ 51 लाख वैक्सीन मिल चुकी है. वहीं, आने वाले अगस्त माह में एक करोड़ वैक्सीन मिलने का अनुमान है. जबकि वर्तमान परिस्थितियों में मध्य प्रदेश को हर माह डेढ़ करोड़ वैक्सीन की आवश्यकता है. ऐसे में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि सितंबर माह तक राज्य के हर व्यक्ति को वैक्सीन की एक डोज लगाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए.

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई मे विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं जिसमें जिलेवार ऑक्सीजन प्लांट की वर्तमान स्थिति से अवगत कराना होगा 


इसके साथ ही निजी अस्पतालों की दरों को लेकर भी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि कोर्ट मित्र द्वारा दिए गए सुझाव पर अमल किए जाएं. कोर्ट मित्र ने हाईकोर्ट को बताया कि देश के आठ राज्यों में निजी अस्पतालों की दरों को निर्धारित किया जा चुका है. ऐसे में मध्य प्रदेश में भी निजी अस्पतालों की दरों को निर्धारित किया जाना चाहिए. इस मामले पर अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय की गई है जिसमें सरकार मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी.

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