सियासत की वजह से भोपाल-इंदौर से पीछे रह गया प्रदेश का ये 'पॉवर सेंटर' शहर

जबलपुर की खराब किस्मत ही कह लें कि कमजोर राजनैतिक नेतृत्व और इच्छाशक्ति के कारण इस शहर को लंबे समय से सिर्फ उपेक्षा और विखंडन का दंश ही झेलना पड़ा है.

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 5, 2019, 4:05 PM IST
सियासत की वजह से भोपाल-इंदौर से पीछे रह गया प्रदेश का ये 'पॉवर सेंटर' शहर
महाकौशल के पॉवर सेंटर जबलपुर का कम हुआ पॉवर.
Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 5, 2019, 4:05 PM IST
जबलपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बदली सत्ता की कमान के बाद महाकौशल (Mahakoshal) को मानो अपना पुराना कद और दबदबा वापस सा मिल गया. कभी प्रदेश की राजनीति का केन्द्र रहा महाकौशल अंचल एक बार फिर पॉवर सेंटर बन गया. मुख्यमंत्री (Chief Minister) समेत विधानसभा अध्यक्ष (Speaker of the Legislative Assembly) और कैबिनेट मंत्रियों (Cabinet Minister's) की लिस्ट अब महाकौशल से आती है, लेकिन इसी अंचल के मुख्य केन्द्र को मानो विखंडन के जख्म झेलने पड़ रहे हैं.

कांग्रेस सरकार आने के बाद लगा कि विकास के साथ उपलब्धियां जबलपुर शहर के नाम होंगी, लेकिन हुआ तो सिर्फ उसका उलट. सरकार की इन नीतियों से एक बड़े जनआंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है.

जबलपुर का कम हुआ दबदबा
कभी प्रदेश की राजधानी बनने की दौड़ में शामिल रहे जबलपुर को न्यायधानी से ही संतुष्ट होना पड़ा था. आज ये प्रदेश की न्यायधानी के साथ संस्कारधानी के नाम से पहचान रखती है, लेकिन ये शहर की खराब किस्मत ही कह लें कि कमज़ोर राजनैतिक नेतृत्व और इच्छाशक्ति के कारण इस शहर को लंबे समय से सिर्फ उपेक्षा और विखंडन का दंश ही झेलना पड़ा. चाहे किसी की भी सरकार आई, लेकिन शहर को कोई खास महत्व नहीं दिला सकी. वहीं उल्टा जो इस शहर का था वो भी उससे छिन गया. बीते साल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ प्रदेश में बदले सियासी तेवर और महकौशल के बढ़े कद ने मानो संस्काधानीवासियों को नई उम्मीद की रोशनी दी, लेकिन वो भी शहर में फैले उपेक्षा के अंधकार को नहीं मिटा सकी.

कभी प्रदेश की राजधानी बनने की दौड़ में शामिल रहे जबलपुर को न्यायधानी से ही संतुष्ट होना पड़ा था.


यूं हुए हालात खराब
>>सबसे पहले रानी दुर्गावति विश्व विद्यालय का विखंडन.
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>>प्रदेश के तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के मुख्यालय को भोपाल शिफ्ट करने की तैयारी.
>>मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्यपीठ का विखंडन. 6 जिलों को इंदौर हाई कोर्ट शिफ्ट करने की तैयारी.
>>शहर को मिली फुटबॉल स्टेडियम की सौगात छिंदवाड़ा को मिल गई.
>>प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर की योजना राजनीति की भेंट चढ़ गई.


मंत्री ने भाजपा पर लगाया आरोप
सरकार के इस रवैये से खफा समाज के अलग-अलग वर्ग के लोग खासे आहत हैं. उनका मानना है कि शहर को लेकर सरकार के विखंडनरूपी फैसले मानो शहरवासियों के लिए किसी बड़े नुकसान से कम नहीं हैं. पूरे मामले में कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया ने स्पष्ट किया कि विखंडन भाजपा सरकार की देन रहा है. उन्होने आश्वस्त किया कि कुछ भी शहर से दूर नहीं होगा और इस सिलसिले में मुख्यमंत्री कमलनाथ से उनकी मुलाकात हुई है.

अगर सियासत से उठकर बात करें तो वाकई शहर को मिले विखंडन के दर्द का सिलसिला कोई नया नहीं है, लेकिन जिस ढ़ग से कांग्रेस सरकार तेजी से शहर में स्थापित मुख्यालयों को तोड़ने मे जुटी है उससे शहर विकास के साथ-साथ पॉवर सेंटर के रूप मे भी कमज़ोर हो रहा है. आज प्रदेश में इंदौर और भोपाल जबलपुर से काफी आगे निकल गए हैं.

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इंदौर मेट्रो एक कदम आगे बढ़ी : 14 सितंबर को CM कमलनाथ रखेंगे आधारशिला

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First published: September 5, 2019, 3:42 PM IST
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