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Jabalpur : इस मुर्गी से लड़ने में बर्ड फ्लू के भी छूट जाएंगे पसीने, जानिए कौन है ये...

इसका शरीर, साधारण मुर्गी से बड़ा और वजनी है. लंबी टांग के कारण यह भागने में तेज होती है.
इसका शरीर, साधारण मुर्गी से बड़ा और वजनी है. लंबी टांग के कारण यह भागने में तेज होती है.

नर्मदा निधि के अंडे (Egg) देसी मुर्गी के समान हल्के भूरे रंग के होते हैं.मुर्गे मात्र 9 से 10 सप्ताह की उम्र में ही 1 किलो ग्राम, 20 सप्ताह की उम्र में 1.5 से 2.20 किलो ग्राम वजनी हो जाते हैं. मुर्गी का वजन 1.3 से 1.70 किलो ग्राम तक होता है.

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जबलपुर.बर्ड फ्लू (Bird flu) के कारण पूरे देश में दहशत का माहौल है. झाबुआ (Jhabua) का कड़कनाथ मुर्गा भी इस बीमारी की चपेट में आ चुका है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी एक मुर्गी ऐसी भी है जिस पर बर्ड फ्लू का खतरा लगभग न के बराबर है.ये है नर्मदा निधि जो गुणों की खान है.

नर्मदा निधि है इसका नाम
ये मुर्गी देखने में तो कड़कनाथ जैसी लगती है. लेकिन यह कड़कनाथ मुर्गी नहीं है. बल्कि इसका नाम है नर्मदा निधि.नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने अखिल भारतीय समन्वित कुक्कुट प्रजनन अनुसंधान परियोजना के तहत ये द्विकाजी संकर नस्ल विकसित की है. इसमें कुक्कुट विज्ञान विभाग ने सहयोग किया. इस नयी नस्ल को कड़कनाथ और देसी प्रजाति नस्ल को मिलाकर बनाया गया है. इन नई प्रजाति का नाम वैज्ञानिकों ने नर्मदा निधि रखा है. इसे पूरी तरह से देसी बनाने के लिए इसके रंग और रूप का भी खास ध्यान रखा गया है.


अद्भुत है नर्मदा निधि


बर्ड फ्लू बीमारी के इस दौर में जब हर पक्षी की जान खतरे में है ऐसे हालात में भी नर्मदा निधि मुर्गी पूरी तरह से सुरक्षित मानी जा रही है. वैज्ञानिकों का दावा है कि नर्मदा निधि, मुर्गियों में होने वाली बीमारियों से लड़ने में सक्षम है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने अनुसंधान के जरिए इसमें ऐसे जींस ट्रांसफर किए हैं, जो मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों के लिए अनुकूल हैं. साधारण मुर्गियों में आंख, नाक, त्वचा, पानी से जुड़ी बीमारियां होती हैं, लेकिन नर्मदा निधि इन बीमारियों से लड़ने में सक्षम है.यहां तक कि बर्ड फ्लू को भी नर्मदा निधि मात दे सकती है.

गुणों से भरपूर है ये मुर्गी
इसके साथ ही नर्मदा निधि मुर्गी में और भी कई ऐसी खासियत हैं जो इसे बाकी मुर्गियों और कड़कनाथ से भी ज्यादा बेहतर बनाती हैं. इसका शरीर, साधारण मुर्गी से बड़ा और वजनी है. लंबी टांग के कारण यह भागने में तेज होती है. इसके साथ-साथ ग्रामीण परिवेश में परभक्षी से बचाव करने में बेहतर है. रिसर्च के ज़रिए इसके गुणों को ऐसा बनाया गया है, जिसकी मदद से यह ग्रामीण माहौल में जल्दी ढल जाती है.साथ ही नर्मदा निधि के अंडे देसी मुर्गी के समान हल्के भूरे रंग के होते हैं.मुर्गे मात्र 9 से 10 सप्ताह की उम्र में ही 1 किलो ग्राम, 20 सप्ताह की उम्र में 1.5 से 2.20 किलो ग्राम वजनी हो जाते हैं. मुर्गी का वजन 1.3 से 1.70 किलो ग्राम तक होता है. वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का दावा है कि नर्मदा निधि प्रजाति की मुर्गी कम लागत में किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचा सकती है. खतरनाक बीमारियों से लड़ने में सक्षम होने के कारण इससे किसानों को नुकसान भी कम होता है.
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