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JABALPUR : जिस यूनिवर्सिटी को मेनका गांधी ने कहा था घटिया, वहां के वेटरनरी डॉक्टर्स ने डॉग के खून से बनाई आंख की झिल्ली

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग की हेड डॉ अपरा शाही की टीम ने ये ऑपरेशन किया.

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग की हेड डॉ अपरा शाही की टीम ने ये ऑपरेशन किया.

वेटनरी अस्पताल (Veterinary university) की इस टीम ने जो तकनीक विकसित की है उस ऑपरेशन में डॉग (Dog) को किसी तरह की दवा देने की जरूरत नहीं पड़ती. डॉग की आंख बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती और लगभग 10 दिन बाद डॉग को पूरी तरह दिखाई देने लगता है.

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जबलपुर. जबलपुर में मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाद अब वेटरनरी यूनिवर्सिटी (veterinary university) के डॉक्टर्स ने भी कमाल कर दिया है. वेटरनरी यूनिवर्सिटी के डॉक्टर्स की टीम ने डॉग के खून से आंख की झिल्ली बनाने में सफलता हासिल कर ली है. इस झिल्ली से डॉग्स में होने वाले कॉर्नियल अल्सर का सफल इलाज किया गया. इस तकनीक से अब तक 50 से ज्यादा डॉग्स के ऑपरेशन किये जा चुके हैं जो पूरी तरह से स्वस्थ हैं.

डॉग्स में कॉर्नियल अल्सर नाम की बीमारी हो जाती है. इस वजह से उन्हें ठीक से दिखाई देना बंद हो जाता है. पहले इसका इलाज डॉग की आंख बंद करके किया जाता था और ऑपेरशन के बाद लगभग 10 दिन के लिए उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती थी. यह प्रक्रिया जितनी जटिल थी उतनी ही तकलीफदायक भी थी.

ये टीम कमाल की है…
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग की हेड डॉ अपरा शाही के मार्गदर्शन में डॉ अपूर्वा मिश्रा, डॉ सोमी अली, डॉ बबिता और पीजी के विद्यार्थियों की टीम ने यह नई तकनीक खोजी है. इसमें डॉग के ब्लड में रेड हिस्से को अलग करके उसके बाकी बचे हिस्से से एक झिल्ली तैयार की जाती है. फिर इस झिल्ली को डॉग की आंख पर लगाकर ऑपेरशन किया जाता है. इस पद्धति में डॉग की आंख बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती और लगभग 10 दिन बाद डॉग को पूरी तरह दिखाई देने लगता है.

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50 से ज्यादा डॉग्स के ऑपरेशन
खास बात ये भी है कि वेटनरी अस्पताल की इस टीम ने जो तकनीक विकसित की है उस ऑपरेशन में डॉग को किसी तरह की दवा देने की भी जरूरत नहीं पड़ती. नयी पद्धति से डॉग का इलाज करने वाली इस टीम में होनहार डॉक्टर्स शामिल हैं. टीम की सदस्य डॉ अपूर्वा मिश्रा को दो बार यंग सर्जन का पुरस्कार भी मिल चुका है. जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी में इस आपरेशन तकनीक की सफलता के बाद अब दूसरे राज्यों की यूनिवर्सिटी के साथ भी इस तकनीक को पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है. बहरहाल इस तकनीक से अभी तक जबलपुर में 50 से ज्यादा डॉग्स के ऑपरेशन किये जा चुके हैं.

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