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दिग्विजय सिंह ने बनाया था सब इंजीनियर, हाईकोर्ट ने निरस्त की नियुक्ति

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिग्विजय सिंह के शासनकाल में नोटशीट पर हुई सब इंजीनियर की नियुक्ति को रद्द करते हुए मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. दिग्विजय सिंह ने नियमों को ताक पर रखते हुए रीवा के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अरुण तिवारी को जल संसाधन विभाग में सब इंजीनियर नियुक्त किया था. हाईकोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया है.

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिग्विजय सिंह के शासनकाल में नोटशीट पर हुई सब इंजीनियर की नियुक्ति को रद्द करते हुए मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. दिग्विजय सिंह ने नियमों को ताक पर रखते हुए रीवा के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अरुण तिवारी को जल संसाधन विभाग में सब इंजीनियर नियुक्त किया था. हाईकोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया है.

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिग्विजय सिंह के शासनकाल में नोटशीट पर हुई सब इंजीनियर की नियुक्ति को रद्द करते हुए मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. दिग्विजय सिंह ने नियमों को ताक पर रखते हुए रीवा के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अरुण तिवारी को जल संसाधन विभाग में सब इंजीनियर नियुक्त किया था. हाईकोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया है.

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    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिग्विजय सिंह के शासनकाल में नोटशीट पर हुई सब इंजीनियर की नियुक्ति को रद्द करते हुए मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. दिग्विजय सिंह ने नियमों को ताक पर रखते हुए रीवा के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अरुण तिवारी को जल संसाधन विभाग में सब इंजीनियर नियुक्त किया था. हाईकोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया है.

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस के.के.त्रिवेदी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'इस तरह की अवैध नियुक्तियों से उन लोगों का हक मारा जाता है, जो योग्य हैं. हर जनप्रतिनिधि का यह नैतिक दायित्व है कि वह नियमों के दायरे में रहकर शासन करें, क्योंकि वे पद संभालने के दौरान इसकी शपथ लेते हैं.'

    सभी अवैध नियुक्तियों की जांच हो

    रीवा के समाजसेवी मनसुखलाल सराफ की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नोटशीट पर जल संसाधन विभाग में अरुण तिवारी की सब इंजीनियर पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया.

    कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे सभी विभागों में अब तक हुई अवैध नियुक्तियों की जांच करवाएं और चार महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करें.

    कौन है अरुण तिवारी..?

    अरुण कुमार तिवारी रीवा के मऊगंज में नगर परिषद में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी था. 1990 में नौकरी पर नियुक्त हुए अरुण तिवारी को 1995 में नियमित कर दिया गया. हाईकोर्ट ने 11 सितंबर 1997 को अपने आदेश में नियुक्तियों को अवैध पाते हुए नियमितिकरण को निरस्त कर दिया.

    याचिकाकर्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के 15 दिन बाद दिग्विजय सिंह ने एक नोटशीट जारी किए अरुण तिवारी की जल संसाधन विभाग में सब इंजीनियर पद पर नियुक्ति की सिफारिश की. आठ महीने बाद मई 1998 में तिवार को जल संसाधन विभाग मे नियुक्त किया गया.

    नियुक्ति से जुड़े हर पहलू की जांच हो

    हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में नोटशीट से लेकर कैबिनेट के निर्णय तक समूची प्रक्रिया की बारीकी से पड़ताल सुनिश्चित करें. इस अवैध नियुक्त के पीछे जिन जिम्मेदारों का हाथ है उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव स्वतंत्र हैं. इसके साथ ही सभी विभागों में भी हुई नियुक्तियों की जांच की जाए और यदि कोई नियुक्ति अवैध पाई जाती है तो तत्काल रद्द करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

    फैसले के खिलाफ अपील करेंगे दिग्विजय

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने इस फैसले को हास्यास्पद बताया. उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुने बगैर ही कोर्ट ने फैसला सुना दिया. इस मामले में उन्हेे कभी कोई नोटिस भी जारी नहीं किया गया. दिग्विजय ने फैसले को प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया हैं. वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे.

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