मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार, पहले की तरह जारी रहेंगे 14 आरक्षण
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मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार, पहले की तरह जारी रहेंगे 14 आरक्षण
जबलपुर हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण मामले में अंतिम बहस के लिए चार हफ्ते बाद सुनवाई की तारीख तय की है

जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने सरकार के जवाब और याचिकाकर्ताओं की आपत्ति को रिकॉर्ड में ले लिया है. और इस मामले पर अंतिम बहस के लिए अगली सुनवाई चार हफ्ते के बाद तय की है. खास बात है कि हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग को बढ़ा हुआ आरक्षण (OBC Reservation) देने से फिर इनकार कर दिया है

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  • Last Updated: August 18, 2020, 9:51 PM IST
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जबलपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बढ़े हुए ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के मसले पर राज्य सरकार (State Government) ने मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) में अपना जवाब पेश किया. सरकार ने अपने जवाब में कहा कि ओबीसी वर्ग (OBC Category) की बड़ी आबादी और उसके सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उन्हें बढ़ा हुआ आरक्षण देना जरूरी है. इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से राज्य सरकार के जवाब पर आपत्ति जताई गई. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार का जवाब सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन के खिलाफ है जिसके मुताबिक सिर्फ आबादी के हिसाब से किसी वर्ग को आरक्षण नहीं दिया जा सकता. साथ ही आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती.

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि इस लिहाज से मध्य प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की कुल आबादी 87 फीसदी है. लेकिन इन्हें 87 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जा सकता. क्योंकि ऐसा होना ना सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत के खिलाफ होगा. बल्कि ऐसा होना, अनारक्षित सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव होगा. फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब और याचिकाकर्ताओं की आपत्ति को रिकॉर्ड में ले लिया है. और इस मामले पर अंतिम बहस के लिए अगली सुनवाई चार हफ्ते के बाद तय की है. खास बात है कि हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग को बढ़ा हुआ आरक्षण देने से फिर इनकार कर दिया है.

जबलपुर हाईकोर्ट ने फिलहाल अपने उस अंतरिम आदेश को जारी रखा है जिसके तहत ओबीसी वर्ग को 27 की बजाय पहले की तरह 14 फीसदी आरक्षण ही दिया जाएगा.
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