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Gandhi Jayanti 2022: जबलपुर में पूरी की गई थी बापू की थी अंतिम इच्छा, तिलवारा घाट में हुई थी अस्थियां विसर्जित

तिलवारा घाट जहां गांधी जी की हुई थी अस्थियां विसर्जित.

तिलवारा घाट जहां गांधी जी की हुई थी अस्थियां विसर्जित.

महात्मा गांधी का नाम आते ही जेहन में अहिंसावादी सोच आने लगती है, और आना लाजमी है भले ही समाज में हर चीज के दो पहलू होते ...अधिक पढ़ें

    अभिषेक त्रिपाठी/जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर में मां नर्मदा के पावन तट (तिलवारा घाट) में राष्ट्रपिता गांधी जी की अस्थियां विसर्जित की गई थीं. साथ ही उनकी अंतिम यादों को संजोए रखने के लिए श्रद्धाजंलि स्वरूप उस घाट के पास गांधी स्मारक बनवाया गया था. जबलपुर में नए महापौर जगत बहादुर अन्नू ने मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में गांधी स्मारक में बापू की याद में एक बड़ा कदम उठाया है जो कि मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा तिरंगा झंडा गांधी स्मारक जबलपुर में लगाने का कहा है जिसकी नींव गांधी जयंती के दिन ही रखने का कहा था.

    बापू की याद में बने स्मारक को देखने पहुंचते हैं पर्यटक
    गांधीवादी सोच और उनकी अंतिम यादों को सहेजने के लिए शहर से तकरीबन 8 किमी दूर तिलवारा घाट के समीप सत्य और अंहिसा का संदेश देता महात्मा गांधी स्मारक बनाया गया जो पर्यटन का केंद्र भी है.जबलपुर शहर में बापू आश्रम बनाना चाहते थे, जबलपुर के इतिहासकार आनंद राणा की मानें तो राष्ट्रपिता गांधी का संस्कारधानी से गहरा नाता रहा है.

    बापू की अंतिम इच्छा थी की उनकी अस्थियां नर्मदा में प्रवाहित को जाएं
    वर्ष 1921 से 1944 के बीच गांधी जी 4 बार जबलपुर आए थे. साथ ही बापू का अध्यात्म से गहरा लगाव था इसलिए तीन बार नर्मदा दर्शन भी बापू ने किया. फरवरी 1941 में भेड़ाघाट धुंआधार जलप्रपात का भी दीदार किया. बापू के अंदर संस्कारधानी का इतना प्रभाव हुआ कि वे यहां आश्रम भी बनाना चाह रहे थे. अफसोस की बात है आश्रम तो नहीं बनवा पाए पर उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि अस्थियां पावन नर्मदा नदी में प्रवाहित की जाएं.

    अस्थियां दर्शन के लिए उमड़ा था हुजूम
    इतिहासकार बताते हैं कि आजादी के महानायक महापुरुष महात्मा गांधी की 30 जनवरी, 1948 को हत्या कर दी गई. उसके बाद उनकी चिता की राख और अस्थियां देश की अलग-अलग नदियों में विसर्जित की गई थी. जबलपुर में भी तिलवारा घाट में उनकी अस्थियां विसर्जित की गईं थी. जब बापू की अस्थियों को शहर लाया गया तो, दूर-दूर से लोग अस्थि के अंतिम दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग बैलगाडि़यो में सवार होकर पहुंचे थे लोगों का हुजूम उमड़ा था.

    गांधी स्मारक परिसर और उद्यान को विकसित कर पर्यटन स्थल के रुप में तैयार किया जा रहा है. जो दीवारें टूटी है ठेकेदार से उसे बनाने कहा गया है. और इन कामों से ज्यादा से ज्यादा पूरा भी हो चुका है साथ ही निरंतर विकास और कायाकल्प जारी है.

    Tags: Jabalpur news, Madhya pradesh news

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