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Makar Sankranti: क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति? पहली पतंग किसने उड़ाई? स्नान क्यों? यहां जानें हर सवाल का जवाब

मकर संक्रांति से जुड़े तमाम फैक्ट्स और रोचक बातें जानिए.

मकर संक्रांति से जुड़े तमाम फैक्ट्स और रोचक बातें जानिए.

Makar Sankranti Facts : मकर संक्रांति यूं तो सूर्यदेव के उत्तरायण होने और धनु से मकर राशि में प्रवेश की घड़ी है, लेकिन ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट : अभिषेक त्रिपाठी

    जबलपुर. इस बार मकर संक्रांति बड़े हिस्से में 15 जनवरी को मनाई जाने वाली है. इस त्योहार के साथ कई धार्मिक मान्यताएं व सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं. मकर संक्रांति पर गंगास्नान या किसी भी पवित्र नदी में स्नान को शुभ माना गया है. इस दिन के स्नान को महास्नान तक कहा गया है. सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, लेकिन जब सूर्य का प्रवेश कर्क व मकर राशियों में होता है, तब इसका धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फल देने वाला कहलाता है. विद्वान कहते हैं अगर आप भी किसी पवित्र जल में स्नान करने के इच्छुक हैं तो इस दिन जरूर करें क्योंकि यह बेहद ही फलदाई हो सकता है.

    ज्योतिष के विद्वानों ने बताया कि स्नान के लिए 15 जनवरी को सूर्योदय से प्रातः 11:11 तक पुण्य काल रहेगा. अब जिज्ञासा है कि मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? कई मान्यताओं में से एक कथा यह भी है कि इस दिन सूर्य देवता स्वयं अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. और शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं, बस यही कारण है कि इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है. एक कथा इस तरह भी प्रचलित है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं.

    मकर संक्रांति पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग?

    तमिल की तन्दनान रामायण में इस सवाल का जवाब मिलता है. इस ग्रंथ के मुताबिक, मकर संक्रांति के अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने पतंग उड़ाई थी और वह पतंग उड़कर इंद्रलोक में चली गई थी. तभी से इस त्योहार के अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा है. इस प्रसंग का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के बालकांड में भी मिलता है. एक संस्कृत श्लोक भी इस संदर्भ में है.

    क्या कह रहे हैं ज्योतिष के विद्वान?

    ज्योतिषाचार्य एवं भागवताचार्य पंडित दीनानाथ त्रिपाठी ने बताया कि इस साल 15 जनवरी को संक्रांति मनाई जाएगी. यह संक्रांति व्यापारियों के लिए लाभकारी रहेगी. दूसरी तरफ, मकर संक्रांति के अवसर पर दान को बेहद शुभ बताया गया है. एक श्लोक में दान की महिमा बताई गई है :

    माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम, स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति

    इस दिन स्नान के बाद दान करने से लाभ की मान्यता रही है. कहते हैं इस त्योहार पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर फिर मिलता है. सबसे अहम यह कि इस दिन शुद्ध घी और कंबल के दान को मोक्ष का कारण कहा जाता है. आम तौर से खिचड़ी दान की जाती है.

    Tags: Jabalpur news, Makar Sankranti

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