एमपी गजब हैः गुमनाम अस्पताल के नाम पर बुक कर दिए कोविशील्ड वैक्सीन के 10000 डोज

काल्पनिक अस्पताल के नाम से 10 हजार कोविशील्ड की डोज बुक कर दी गयीं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

काल्पनिक अस्पताल के नाम से 10 हजार कोविशील्ड की डोज बुक कर दी गयीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Vaccine Scam In Jabalpur: सीरम की वैक्सीन सप्लाई लिस्ट में अस्पताल का नाम, लेकिन वजूद है ही नहीं. बड़े घोटाले से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. जांच शुरू हो गई है. हाल ही में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के रैकेट का भंडाफोड़ यहां हो चुका है.

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जबलपुर. मध्यप्रदेश का जबलपुर शहर दवा कालाबाजारी और घोटालों के चलते काफी कुख्यात हो चुका है. पिछले दिनों नकली रेमडेसिविर गिरोह का भांडा फूटने के बाद अब वैक्सीन का जो नया गोलमाल सामने आया है, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या वैक्सीन की भी कालाबाजारी की जाना थी? एक ऐसा ही मसला यहां सामने आया है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग अभी मौन है. मैक्स हेल्थ केयर अस्पताल जबलपुर के नाम से सीरम इंस्टीट्यूट को कोविशील्ड की 10 हजार डोज की बुकिंग करवायी गयी. लेकिन पता चला कि इस नाम का तो कोई अस्पताल जबलपुर में है ही नहीं.

जबलपुर में हाल ही में कोविशील्ड की 10000 डोज की बुकिंग का मामला सामने आने के बाद अब सुर्खियां बन चुका है. मैक्स हेल्थ केयर नाम के अस्पताल ने सीरम इंस्टीट्यूट पुणे से कोविशील्ड की 10,000 डोज की बुकिंग करवाईं. इसकी सूची केंद्र सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य महकमे को दी,, लेकिन जांच में पता चला कि इस नाम का कोई अस्पताल ही नहीं है. यानि काल्पनिक अस्पताल के नाम से 10 हजार कोविशील्ड की डोज बुक कर दी गयीं. इसकी कीमत 60 लाख रुपये है.

ऐसे खुली पोल

पूरा मामला भोपाल से मिले पत्र के बाद उजागर हुआ. जब टीकाकरण अधिकारी को अस्पताल का निरीक्षण करने के आदेश दिए गए. जांच में टीकाकरण अधिकारी ने पाया कि ऐसा कोई अस्पताल है ही नहीं. इस नये खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हल्ला मच गया. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वैक्सीन की कालाबाजारी की तैयारी थी. और क्या इसके पीछे नकली इंजेक्शन जैसा ही कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था?


कौन है इसके पीछे

बात जबलपुर की है, इसलिए सवाल उठना भी लाजमी है, क्योंकि हाल ही में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के रैकेट का भंडाफोड़ यहां हो चुका है. इसमें अस्पताल संचालक ही शामिल था. इसलिए स्वास्थ्य महकमे का इस मामले को हल्के में लेना कहीं फिर भारी ना पड़ जाए. जिले के टीकाकरण अधिकारी ने इस मामले में भोपाल को पत्र भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करना समझ लिया है. लेकिन संजीदा दिख रहे हैं इस मसले पर क्या जवाब देकर इतिश्री करना ही काफी है ? क्या मामले की जांच नहीं होनी चाहिए कि आखिर कैसे काल्पनिक अस्पता,ल के नाम पर कोविशील्ड वैक्सीन की 10 हजार डोज की बुकिंग कर दी गई.

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