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मंत्री तोमर-सिंधिया मामले के बाद अब MP के विधानसभा अध्यक्ष ने छूए दिग्विजय सिंह के पैर

Pavan Patel | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 15, 2019, 7:06 PM IST
मंत्री तोमर-सिंधिया मामले के बाद अब MP के विधानसभा अध्यक्ष ने छूए दिग्विजय सिंह के पैर
दिग्विजय ने कहा गोडसे की पूजा करने वाले उन्हीं की विचारधारा वाले

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) जैसे ही जबलपुर (Jabalpur) के बगुलामुखी मंदिर (Bagulamukhi Temple) पहुंचे वहां पहले से मौजूद विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति उनके समक्ष नतमस्तक हो गए. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों एक साथ मंदिर पहुंचे और माता बगुलामुखी के दर्शन किए.

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जबलपुर. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इन दिनों चर्चा में हैं. जहां उनके भाई लक्ष्मण सिंह (Laxman singh) प्रदेश सरकार पर 11 महीनों में एक भी काम न कर पाने के आरोप लगा रहे हैं वहीं प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) का उनके समक्ष नतमस्तक होना भी सुर्खियों में है. मौका बगुलामुखी मंदिर के विजय द्वार के भूमिपूजन का था. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस भूमिपूजन में शामिल होने के लिए जबलपुर पहुंचे थे, जहां विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति (NP Prajapati) भी पहले से ही मौजूद थे. दिग्विजय सिंह जैसे ही मंदिर के सामने पहुंचे, विधानसभा अध्यक्ष तत्काल उनके स्वागत के लिए वहां पहुंच गए और पूर्व मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. दिग्विजय सिंह भले ही अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन उनका रुतबा अभी भी सबसे ऊपर है, शायद यही वजह है कि विधानसभा अध्यक्ष भी उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं.

पैर छूने को लेकर हुई थी आलोचना
पिछले दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैर छूने को लेकर मंत्री प्रद्युम्न सिंह की काफी आलोचना हुई थी. हालांकि वरिष्ठ नेताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा राजनीति में पुरानी है, लेकिन एक वैधानिक पद पर रहते हुए इस तरह के कार्य कई बार लोगों को प्रभावित करते हैं तो वहीं संवैधानिक पद की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाते हैं.

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दिग्विजय ने कहा कि राजनीति से दूर रहने वाली संस्था बनाए राम मंदिर


राजनीति से दूर रहने वाली संस्था बनाए राम मंदिर
राम मंदिर पर फैसला होने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमें स्वीकार है और कांग्रेस हमेशा कहती आई है कि सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए. जहां तक ट्रस्ट बनाने वाली बात है तो ऐसी संस्था को मान्यता देनी चाहिए जिसका राजनीति और राजनेताओं से कोई लेना-देना न हो. राम मंदिर का फैसला भाजपा शासन में आने की बात पर उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ धर्म की राजनीति करती है और 1984 के बाद भाजपा ने राम मंदिर की बात शुरू की थी जबकि कांग्रेस उसके पहले भी राम मंदिर निर्माण के लिए प्रयास करती रही है.

गोडसे की पूजा करने वाले उन्हीं की विचारधारा वालेग्वालियर में नाथूराम गोड्से की पूजा करने पर उन्होंने जमकर आलोचना की. दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये वही विचारधारा है जिसने महात्मा गांधी की हत्या की थी, भाजपा को ऐसे संगठनों से दूर रहना चाहिए. दरअसल जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के इस मठ के प्रवेश द्वार को विजय द्वार नाम दिया गया है जिसका भूमिपूजन करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया से चर्चा की और कहा कि आज देश में सबसे वरिष्ठ गुरू स्वामी स्वरूपानंदजी हैं और वे शतायु हों ऐसी वे भगवान से प्रार्थना करते हैं.

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First published: November 15, 2019, 4:21 PM IST
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