सरकार ने खुद दी निजी अस्पतालों को लूट की छूट, जानिए हाई कोर्ट ने और क्या-क्या कहा

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को जबरदस्त फटकार लगाई है. निजी अस्पतालों की लूट पर पूछे हैं कई सवाल. (File)

मध्य प्रदेश सरकार हो हाई कोर्ट ने जबरदस्त लताड़ा है. कोर्ट ने सरकार से कई सवाल किए हैं. मप्र सरकार ने खुद निजी अस्पतालों को लूट की छूट दे दी. हाई कोर्ट ने 4 दिन में जवाब मांगा है.

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जबलपुर. कोरोना आपदा मामले में सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की है. हाई कोर्ट ने कहा कि जैसा उसने आदेश दिया था वैसा सरकार ने नहीं किया, जिसके चलते आज भी निजी अस्पताल जनता को लूट रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक ने कहा कि जनता अपने जेवर-जमीन बेचकर निजी अस्पतालों की फीस चुकाने को मजबूर है. जनता को लूटा जा रहा है. लेकिन, जनता का दर्द हमारा दर्द है.

हाई कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज की अधिकतम दरें तय नहीं कीं और अब सरकार कह रही है कि वो निजी अस्पतालों की दर नियंत्रित नहीं कर सकती. दरअसल राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में जवाब पेश किया कि निजी अस्पतालों की दरें तय करना व्यवहारिक नहीं है और वो ऐसा नहीं कर सकती.

40 फीसदी दरें बढ़ाने के नाम पर मनमानी

कोर्ट ने पाया कि सरकार के पास कोरोना पूर्व इलाज की दरों का कोई ब्यौरा ही नहीं था. निजी अस्पतालों ने चालीस फीसदी दरें बढ़ाने के नाम पर मनमानी दरें बढ़ाईं, जिसे राज्य सरकार की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया. हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने अस्पतालों में इलाज की अधिकतम दरें तय करने की बजाय खुद निजी अस्पतालों को ही मनमानी दरें तय करने की छूट दे दी, जो हाईकोर्ट के मूल आदेश के खिलाफ है.

4 दिन में जवाब पेश करने का आदेश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो निजी अस्पतालों की दरें तय करने पर निर्णय ले. यही आदेश हाई कोर्ट ने करीब एक माह पहले राज्य सरकार को दिया था. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और कोर्ट मित्र नमन नागरथ को आदेश दिया है कि वो निजी अस्पतालों की विभिन्न श्रेणियों में इलाज की अधिकतम दरें तय करने पर विचार करें और अपना जवाब हाई कोर्ट में पेश करें. हाईकोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 24 मई की तारीख तय की है.

सरकार बताए- 20 सालों में क्या किया

बता दें, सुनवाई के दौरान जब प्रदेश के महाधिवक्ता ने ये कहा कि जो सत्तर सालों में नहीं हुआ वो प्रदेश में अब हो रहा है, तो हाई कोर्ट ने तल्खी दिखाई. हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि उन्हें 70 सालों से कोई मतलब नहीं है, लेकिन मौजूदा सरकार 20 सालों से प्रदेश में है. वो ये बताए कि इन 20 सालों में उसने क्या किया.