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MP News: बक्सवाहा में मिली आग की खोज से पहले की रॉक पेंटिंग, जानिए ASI ने सरकार को क्या सौंपी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बकस्वाहा के जंगल बचाने कई पर्यावरण प्रेमी शपथ तक ले रहे हैं. (File)

मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बकस्वाहा के जंगल बचाने कई पर्यावरण प्रेमी शपथ तक ले रहे हैं. (File)

Madhya Pradesh News: एएसआई ने बक्सवाहा पर सर्वे कर लिया है. एएसआई ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट कहती है कि जहां हीरा खदान प्रस्तावित है, वहां मानव इतिहास की महत्वपूर्ण चीजें हैं. इनसे मानव इतिहास को समझा जा सकता है.

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जबलपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के बक्सवाहा में विवादित हीरा खदान को लेकर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (archaeological survey of india-ASI) की चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है. ASI की रिपोर्ट कहती है कि जहां खदान स्थापित की जानी है वहां पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व की कई महत्वपूर्ण चीजें मिली हैं. हाई कोर्ट और NGT के निर्देश पर ASI ने छतरपुर के बक्सवाहा में अपना सर्वे पूरा कर लिया है.

ASI ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के छतरपुर जिले में स्थित बक्सवाहा पर अपनी सर्वे रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बक्सवाहा में हजारों साल पुरानी 3 बड़ी रॉक पेंटिंग्स और कल्चुरी कालीन मूर्तियां पाई गईं. ASI को मिली पहली रॉक पेटिंग लाल रंग से बनाई गई है, जो आग की खोज से पहले की बताई जा रही है. एक दूसरी रॉक पेंटिंग पाषाण युग से मध्यकाल की है. ये लाल रंग और चारकोल से बनाई गई है. इसे आग की खोज के बाद का बताया जा रहा है. वहीं, एक और तीसरी रॉक पेंटिंग मानव इतिहास को दर्शाती है. इसमें पहाड़ों और गुफाओं पर युद्ध के चित्र उकेरे गए हैं. ASI को सर्वे में बक्सवाहा के गांवों में भगवान गणेश और हनुमान के अलावा चंदेल और कल्चुरी कालीन मूर्तियां भी मिली हैं. इनकी तस्वीरों को सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है.

इन चीजों को सहेजने की जरूरत- याचिकाकर्ता

ASI के जबलपुर सर्किल ने अपनी ये सर्वे रिपोर्ट भोपाल सर्किल दफ्तर को सौंप दी है. इस रिपोर्ट की एक कॉपी कॉपी याचिकाकर्ता को भी दी गई है. याचिकाकर्ता के मुताबिक ASI की सर्वे रिपोर्ट से ये साबित हो गया है कि बक्सवाहा के इलाके और यहां मिली पुरातात्विक महत्व की चीजों को सहेजने की जरूरत है. क्योंकि, इनसे मानव इतिहास के सांस्कृतिक क्रम को समझा जा सकता है.

हीरा खदान को रद्द करने की मांग

गौरतलब है कि ASI की ये सर्वे रिपोर्ट NGT और हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई से पहले पेश की जानी है. बता दें कि राज्य सरकार ने छतरपुर जिले के बक्सवाहा में 364 हैक्टेयर वन क्षेत्र को हीरा खदान के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल मायनिंग कंपनी को सौंपा है. इसके खिलाफ हाई कोर्ट और NGT में याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया है कि हीरा खदान से ढाई लाख से ज्यादा पेड़ों के कटने से पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान होगा. वहीं, बक्सवाहा में मौजूद पुरातात्विक महत्व की रॉक पेंटिंग्स भी नष्ट हो जाएंगी. याचिका में बक्सवाहा की विरासत को सहेजने और हीरा खदान की अनुमति रद्द करने की मांग की गई है.

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