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CSD कैंटीन मामला: EOW ने मांगे दस्तावेज, सहायक आबकारी आयुक्त पर कसा शिकंजा

सेना की कैंटीन का शराब लाइसेंस देरी से रिन्यू करने के मामले में ईओडब्ल्यू ने शिकंजा कस दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)

सेना की कैंटीन का शराब लाइसेंस देरी से रिन्यू करने के मामले में ईओडब्ल्यू ने शिकंजा कस दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)

Madhya Pradesh News: सेना की सीएसडी कैंटीन का लाइसेंस रिन्यू न होने से सरकार को करोड़ों का घाटा हो गया. इसलिए अब इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा है. जांच एजेंसी ने सभी संबंधित विभागों से जरूरी दस्तावेज मंगवाए हैं.

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जबलपुर. सेना के सीएसडी कैंटीन को शराब लाइसेंस रिन्यू करने में देरी का मामला अब EOW की जांच के दायरे में है. 2 दिन पूर्व ही मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा सहायक आबकारी आयुक्त और उनके कार्यालय में पदस्थ क्लर्क के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. धारा 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोनों पर मुकदमा दर्ज किया गया है. तत्कालीन कलेक्टर के आवेदन के आधार पर लंबे समय से EOW मामले में छानबीन कर रहा था.

जानकारी के मुताबिक, शराब लाइसेंस रिन्यू करने की फाइल दबा कर समय पर लाइसेंस न जारी करने से शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ था. आशंका है कि स्थानीय शराब ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए समय पर सीएसडी कैंटीन का लाइसेंस रिन्‍यू नहीं किया गया. अब मामले में EOW ने संभागीय उड़नदस्ते के उपायुक्त केके दोहरे को तलब किया है. इसके साथ ही शराब लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज भी मांगे हैं.

जांच एजेंसी ने तलब किए सारे दस्तावेज
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सेना के लिए शराब की सप्लाई की जाती है. इसके लिए हर साल 31 मार्च को लाइसेंस रिन्यू करना होता है. 2018-19 में डिपो द्वारा निर्धारित समय पर लाइसेंस रिन्यू करने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन उक्त फाइल को सहायक आबकारी आयुक्त सत्यनारायण दुबे और क्लर्क विवेक उपाध्याय दबा कर रखे हुए. ईओडब्ल्यू ने 2018-2019 में जारी किए गए शराब लाइसेंस से जुड़े सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं. वहीं सीएसडी डिपो के प्रबंधक और कलेक्ट्रेट को भी पत्र लिखकर लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं.

जांच एजेंसियों को फ्री हैंड
मध्य प्रदेश (MP) सरकार ने जांच एजेंसियों को फ्री हैंड दे दिया है. वो अब भ्रष्ट अफसरों की सीधे जांच कर सकेंगी. इन्हें अब भ्रष्ट अफसरों की जांच करने के लिए किसी भी संबंधित विभाग से परमिशन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.सरकार ने पहले भ्रष्टाचार और घोटालों की जांच करने वाली एजेंसियों के पर कतर दिये थे. लेकिन जब इस आदेश और प्रावधान की आलोचना हुई और इसके खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई गई तो सरकार बैकफुट आ गई. सरकार ने फिर जांच एजेंसियों को भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच करने के लिए फ्री हैंड दे दिया है.

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