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Independence Day 2021: कविता से आजादी की चिंगारी को बनाया शोला, तोप से ऐसे उड़ा दिए गए महाराज-राजकुमार

Independence Day 2021: कविता से आजादी की चिंगारी को बनाया शोला, तोप से ऐसे उड़ा दिए गए महाराज-राजकुमार

स्वतंत्रता संग्राम में गोंडवाना साम्राज्य के राजा शंकरशाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे. (File)

स्वतंत्रता संग्राम में गोंडवाना साम्राज्य के राजा शंकरशाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे. (File)

Madhya Pradesh News: देश की आजादी में यूं तो लाखों लोगों ने बलिदान दिया. लेकिन, देश की संस्कार राजधानी जबलपुर के राजा और राजकुमार कुछ अलग ही थे. दोनों ने छंदों से लोगों में आजादी की चिंगारी सुलगाई जो अंग्रेजों के खिलाफ आग बन गई.

जबलपुर. हिंदुस्तान को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए लाखों लोगों ने अपना बलिदान दिया. इनमें से कुछ ऐसे भी लोग थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में शहादत से ऐसी चिंगारी को हवा दी जो अंग्रेजों के लिए आग बन गई. ऐसी ही एक चिंगारी को अपनी कविताओं से हवा दी अमर शहीद शंकरशाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह ने. गोंडवाना साम्राज्य का गौरवशाली इतिहास आज भी अमर है.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) की संस्कारधानी जबलपुर गोंडवाना शासकों की वीरता और उनके द्वारा किए कार्यों से समृद्ध है. इस साम्राज्य में दो वीर हुए राजा शंकरशाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह. उन दिनों तोप के सामने खड़ा करके बारूद से उड़ जाना आम लोगों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी. लेकिन, उन्होंने ये कल्पना कभी नहीं की थी कि ऐसी खौफनाक मौत के सामने भी कोई अपनी वीर रस से भर कविताओं से उनमें जोश भर देगा, आजादी की अलख जगा देगा.

अंग्रेजों की गुलामी नही थी मंजूर

गोंड वंश के राजा शंकरशाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह ने उस दौरान अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था. उस वक्त कई बड़ी-बड़ी रियासतें अंग्रेजों के सामने कमजोर साबित हो रही थीं. जबलपुर में अंग्रेजों की पकड़ लगातार बढ़ती जा रही थी. अंग्रेज चाहते थे कि जबलपुर से पूरे महाकौशल में कंपनी का वर्चस्व फैलाया जाए. लेकिन, राजा शंकर शाह को यह मंजूर नहीं था. उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेने का न केवल मन बनाया, बल्कि मैदान में भी उतर गए.

धोखे से अंग्रेजों ने राजा-राजकुमार को घेर लिया

1857 में जबलपुर में तैनात अंग्रेजों की 52वीं रेजिमेंट का कमांडर क्लार्क बहुत क्रूर था. वह छोटे राजाओं, जमीदारों और जनता को बहुत परेशान करता था. यह देखकर गोंडवाना (वर्तमान में जबलपुर) के राजा शंकरशाह ने उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. राजा और राजकुमार दोनों अच्छे कवि थे. उन्होंने कविताओं द्वारा विद्रोह की आग पूरे राज्य में सुलगा दी. लेकिन, यह बात अंग्रेजों को नागवार गुजरी. उन्होंने राजा शंकरशाह और उनके बेटे को घेरने की योजना बनाई. अंग्रेजों ने अपनी गुप्तचर सेवा के जरिए यह पता लगा लिया कि दोनों उनके खिलाफ कौन सी रणनीति बना रहे हैं. उसके बाद अंग्रेजों ने 14 सितंबर की रात को शंकर शाह के महल को चारों ओर से घेर लिया. राजा की तैयारी अभी अधूरी थी. अतः धोखे के चलते राजा शंकरशाह और उनके 32 वर्षीय पुत्र रघुनाथ शाह बन्दी बना लिए गए. जबलपुर शहर में अब भी वह स्थान है जहां पिता-पुत्र को मृत्यु से पूर्व बंदी बनाकर रखा गया था.

पिता-पुत्र को उड़ा दिया तोप से

18 सितम्बर, 1857 को दोनों को अलग-अलग तोप के मुंह पर बांध दिया गया. मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपनी प्रजा को एक-एक छन्द सुनाया. पहला छन्द राजा ने सुनाया और दूसरा उनके पुत्र ने. छंद पूरे होते ही जनता ने राजा एवं राजकुमार के नाम के जयकारे लगाना शुरू कर दिए. इससे अंग्रेज डर गए. सिपाहियों ने तोप में आग लगा दी. भीषण गर्जना के साथ चारों ओर धुआं भर गया. महाराज शंकर शाह और राजकुमार रघुनाथ शाह वीरगति को प्राप्त हो गए. राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों की दर्दनाक मौत को हंसते-हंसते स्वीकार कर लिया, लेकिन अंग्रेजों के सामने झुकना पसंद नहीं किया.

अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुई बगावत

1857 में हुई इस घटना के बाद पूरे गोंडवाना साम्राज्य में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत शुरू हो गई. शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान ने लोगों के मन में अंग्रेजो के खिलाफ एक ऐसी चिंगारी को जन्म दे दिया जो बाद में शोला बन गई. लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इन वीर सपूतों को इतिहास के पन्नों में जो जगह मिलनी चाहिए थी वह आज भी नहीं मिल सकी है. लेकिन इसके लिए इतिहासकार प्रयास जरूर कर रहे हैं. इतिहासकार डॉ.राणा ने बताया कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अंतर्गत इतिहास के पुनर्लेखन में यह सभी भूले बिसरे तथ्य शामिल हो रहे हैं.

Tags: 75th Independence Day, Mp news

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