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MP NEWS : गहरा सकता है बिजली संकट, सिर्फ 4 दिन का बचा है कोयला

Power Crisis : mज में 9 थर्मल पावर प्लांट हैं.

Power Crisis : mज में 9 थर्मल पावर प्लांट हैं.

Power crisis : एक औसत के मुताबिक विदेश में कोयला प्रति टन 200 डॉलर के आसपास बिकता है. जो भारतीय मूल्य में करीब 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब में बैठता है. ऐसे में एक बड़ी वृद्धि भी विद्युत दरों में हो सकती है.

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जबलपुर. देशभर में छाए कोल क्राइसिस (Coal Crisis) को लेकर आज एक और चिंताजनक खबर सामने आई. केंद्र सरकार ने तमाम प्रदेशों और केंद्रीय विद्युत इकाइयों को पत्र लिखा है. इसमें उसने कहा है कि कोयले (Coal) की कमी दूर करने के लिए 10 प्रतिशत कोयला आयात किया जाए.

भारत सरकार ने अपने पत्र में माना है कि कोल इंडिया का उत्पादन नहीं बढ़ा है. विद्युत गृहों में 31 मार्च 2021 तक 28.9 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था. ये घटकर अब 7 अक्टूबर तक सिर्फ 7.3 मिलियन टन बचा है. ये देश भर की मांग के तहत सिर्फ 4 दिन का शेष है.

सिर्फ 4 दिन का कोयला बचा -सरकार के इस पत्र के बाद मध्य प्रदेश में हालात और ज्यादा चिंताजनक हो गए हैं. कहने को मध्यप्रदेश में 9 थर्मल और 10 हाइड्रो पावर प्लांट हैं. इनमें विद्युत उत्पादन की कुल क्षमता 6315 मेगावाट है. बहरहाल मध्यप्रदेश में उपलब्ध कोयले का स्टॉक भी ऊंट के मुंह में जीरे बराबर है.

MP में ये हैं हालात
फिलहाल मध्य प्रदेश के पास 238400 मीट्रिक टन कोयला बचा है. जबकि रोजाना की खपत 70000 मीट्रिक टन है. आंकड़े को देखते हुए कहा जा सकता है कि फिलहाल मध्यप्रदेश में सिर्फ चार दिन की बिजली ही बची हुई है. केवल चार विद्युत ताप गृहों में कोयला बचा है जिसमें अमरकंटक पावर स्टेशन के पास 25800 मीट्रिक टन, संजय गांधी पावर हाउस के पास 74800 मीट्रिक टन, सतपुड़ा पावर प्लांट के पास 61700 मीट्रिक टन और सिंगाजी खंडवा पावर प्लांट के पास 70100 मीट्रिक टन का कोयला उपलब्ध है.

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महंगी हो सकती है बिजली
केंद्र सरकार के इस पत्र के बाद से बिजली संकट और गहराने का अंदेशा है. उपभोक्ताओं की जेब भी ज्यादा ढीली हो सकती है.  ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार ने 10þ कोयला आयात करने के आदेश राज्यों को दिए हैं. ऐसे में एक औसत के मुताबिक विदेश में कोयला प्रति टन 200 डॉलर के आसपास बिकता है. जो भारतीय मूल्य में करीब 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब में बैठता है. ऐसे में एक बड़ी वृद्धि भी विद्युत दरों में हो सकती है.

कहीं फिर न गहरा जाए बिजली संकट
बिजली मामलों के जानकार राजेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि अगर सरकार कोयला आयात करती है तो बड़ी भारी रकम उपभोक्ताओं पर ही भार के रूप में पड़ेगी. जो भी हो कोयला क्राइसिस के इस दौर में कहीं मध्यप्रदेश फिर बिजली कटौती का नया अध्याय ना देखे. इसका अंदेशा बना हुआ है. उम्मीद की जा रही है कि सरकार बिजली संकट के इस दौर में किसी वैकल्पिक इंतजाम की ओर जल्द पहुंचेगी.

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