Home /News /madhya-pradesh /

शर्मनाक: 14 साल के AIDS पीड़ित बच्चे को घरवालों ने निकाला, जानिए कैसे कर रहा जिंदगी से संघर्ष

शर्मनाक: 14 साल के AIDS पीड़ित बच्चे को घरवालों ने निकाला, जानिए कैसे कर रहा जिंदगी से संघर्ष

एमपी के जबलपुर में 14 साल के बच्चे को एड्स हुआ तो घरवालों ने निकाल दिया. फिल्मी कहानी से कम नहीं बच्चे की स्टोरी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एमपी के जबलपुर में 14 साल के बच्चे को एड्स हुआ तो घरवालों ने निकाल दिया. फिल्मी कहानी से कम नहीं बच्चे की स्टोरी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में 14 साल के AIDS पीड़ित बच्चे की कहानी दर्दभरी है. 12 साल पहले उसके माता-पिता की मौत हो गई. उसके बाद चाचा ने पाला, लेकिन जैसे ही उसे बच्चे की बीमारी का पता चला, उसने घर से निकाल दिया.

जबलपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के जबलपुर से चौंकाने वाली खबर है. यहां 14 साल के एक AIDS पीड़ित बच्चे को घरवालों ने घर से निकाल दिया. इस नाबालिग मरीज की कहानी संघर्षों से इतनी भरी है कि यकीन करना मुश्किल है. 12 साल पहले माता-पिता की मौत के बाद जिन्हें इसका जीवन संवारना था, उन्होंने दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया. इस बच्चे को जबलपुर में मोक्ष संस्था ने सहारा दिया.

14 साल का गोलू (बदला हुआ नाम) दमोह जिले का रहने वाला है. उसने 9वीं तक पढ़ाई भी की है. पढ़ने में होनहार इस बच्चे की सारी खुशियां एक बीमारी ने छीन लीं. गोलू के माता-पिता 12 साल पहले ही गुजर गए. इसके बाद उसकी जिम्मेदारी चाचा पर आ गई. लेकिन, जैसे ही चाचा को उसकी बीमारी के बारे में पता चला तो उसने गोलू को बस की टिकट के पैसे दे दिए और घर से निकाल दिया. गोलू बस से जबलपुर तो पहुंच गया, लेकिन वहां से कहां जाए इसका कोई ठिकाना नहीं था.

गोलू को यहां मिले अपने
इस बीच गोलू की तकदीर उसे मोक्ष संस्था ले आई. यहां आशीष ठाकुर ने इस बच्चे को न केवल सहारा दिया, बल्कि एक बड़े भाई की भूमिका अदा की. उसने गोलू को पूरे इलाज और अपनों के बीच रहने का भरोसा दिलाया. मासूम गोलू के लिए इस आश्रय घर में रहने वाले ही अपने हैं. वे उसकी दिन-रात देखभाल कर रहे हैं, लेकिन, फिर भी गोलू को मदद की आस है. उसकी और सहायता के लिए कोशिश जारी है.

इस अजीबो-गरीब खबर पर भी डालें नजर

मध्य प्रदेश के गुना (Guna News) से शर्मनाक मामला सामने आया है. यहां आजादी के बाद से लेकर आज तक दलितों को श्मशान घाट तक मुहैया नहीं हुआ है. उन्हें परिजनों की मौत के बाद खुद ही सारा इंतजाम करना होता है. ऐसा ही एक मामला जिले के बांसाहैड़ा गांव में देखने को मिला. यहां 45 साल की एक महिला की मौत के बाद ग्रामीणों को न केवल चिता के लिए जरूरी चीजों, बल्कि टीन की चादरों से लेकर शेड तक की व्यवस्था खुद करनी पड़ी. महिला के शव को टायर और डीजल से जलाना पड़ा.

जानकारी के मुताबिक, बांसाहैड़ा गांव की 45 साल की महिला रामकन्या बाई हरिजन की शुक्रवार सुबह 10:00 बजे मौत हो गई. लेकिन, तेज बारिश के चलते परिजनों ने मृतक का शव डेढ़ घंटे तक घर में ही रखा. जब बहुत देर तक बारिश बंद नहीं हुई तो परिजन और गांव वाले शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे. बता दें, यहां तक आने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है. लोगों को कीचड़ भरे रास्ते से आना पड़ता है. इसकी वजह से कई बार शव के गिरने की डर बना रहता है.

Tags: Aids, HIV, Mp news, Weird news

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर