MP News: 70 फीसदी तक घट गया रेमडेसिविर इंजेक्‍शन का उपयोग, जानिए क्या है वजह


रेमडेसिविर इंजेक्‍शन की मांग घटी

रेमडेसिविर इंजेक्‍शन की मांग घटी

Madhya Pradesh News: मध्‍य प्रदेश के जबलपुर में जब से रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन का रैकेट उजागर हुआ है. उसके बाद से ही अस्पतालों की डिमांड और मरीजों ने भी इसे उपयोग में लाने कम कर दिया है.

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रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत से परेशान मरीजों और उनके परिजनों ने अब इस इंजेक्शन से मानो तौबा कर ली है. कम से कम मध्‍य प्रदेश के जबलपुर से तो कुछ ऐसे ही तस्वीर सामने आई है, जहां इस इंजेक्शन की डिमांड और खपत 70 फीसदी कम हो गई है.

नकली रेमडेसिविर रैकेट के खुलासे के बाद अचानक आई गिरावट

अनुमान के मुताबिक, जब से रेमडेसिविर के नकली इंजेक्शन का रैकेट उजागर हुआ है. उसके बाद से ही अस्पतालों की डिमांड और मरीजों ने भी इसे उपयोग में लाने कम कर दिया है. लाजमी है रेमडेसिविर को लेकर यह स्थिति इसलिए भी बनी है क्योंकि इस इंजेक्शन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं. बीते दिनों उजागर हुए नकली रेमडेसिविर रैकेट में जबलपुर के सिटी हॉस्पिटल का नाम उजागर हुआ था, जहां करीब साढ़े 400 से ज्यादा नकली इंजेक्शन मरीजों को लगा दिए गए. इससे ना जाने कितने मरीजों ने दम भी तोड़ दिया होगा.

इस मामले की जांच पुलिस कर रही है, जो भी हो 7 दिनों के भीतर रेमडेसिविर की खपत में 70 फीसदी की कमी आना कई सवाल खड़े कर रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिन अस्‍पतालों में मरीज भर्ती हैं, वहां चिकित्सक ही मरीजों के परिजनों को इस इंजेक्शन की आपूर्ति के लिए पत्र दिया करते थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गए हैं या काफी कम.
अब उठ रहे हैं ये सवाल

- क्या जानबूझकर रेमडेसिविर को लेकर एक दबाव भरा माहौल बनाया गया ?

- क्या इस ड्रग की आवश्यकता हर कोविड-19 पैशेंट को थी जिसके चलते एकदम से इसकी डिमांड बढ़ी ?



- और कालाबाजारी का व्यापार पनपा?

ये तमाम सवाल हर किसी के जहन में उठ रहे हैं. बहरहाल इस मामले में जिम्मेदार एक कारण नकली रेमडेसिविर रैकेट उजागर होने भी मानते हैं, लेकिन उनका यह भी कहना है कि हाल ही में मरीजों की संख्या में कमी आई है और यही वजह है कि इसकी डिमांड गिर गई है. जबकि आंकड़े बताते हैं कि आज भी निजी अस्पताल में दाखिल होना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है. जो भी हो अब तक बेहद आवश्यक बने रेमडेसिविर को लेकर अब अस्पतालों का रवैया बदल गया है.

बीते दिनों जारी हुई सूची में स्पष्ट हुआ कि शहर के छोटे बड़े 71 अस्पतालों में से 20 अस्पतालों ने तो रेमडेसिविर की डिमांड तक नहीं की. जो भी हो बीते 7 दिनों में रेमडेसिविर को लेकर आम जनता ने काफी कुछ देखा है. मरीज यह तो समझ गए हैं कि इस इंजेक्शन के चलते कि कोई मरीज ठीक हुआ हो या नहीं लेकिन कालाबाजारी करने वाले जरूर पनप गए.

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