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लैब की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, डायबिटीज के हजारों मरीजों को दे दी 'गलत' दवा, जानें पूरा मामला

अमानक दवाइयों की रिपोर्ट दो साल बाद आयी.
अमानक दवाइयों की रिपोर्ट दो साल बाद आयी.

पांच हजार में से 4 हजार 800 टेबलेट मरीजों को बांटी जा चुकी थीं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट मिलते ही दवा का वितरण फौरन बंद कर दिया गया. बची हुई 200 टेबलेट शासन को लौटा दी गईं.

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जबलपुर. मध्‍य प्रदेश के जबलपुर (Jabalpur) के सरकारी अस्पताल में डायबिटीज के मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ किया गया. विक्टोरिया जिला अस्पताल में डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों को अमानक टेबलेट बांट दी गयी थी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब भोपाल की राज्य स्तरीय प्रयोगशाला से दवाओं की जांच रिपोर्ट आई.

2019 में हुई थी सैम्पलिंग-2020 में आई रिपोर्ट
डायबिटीज मरीज़ों का शुगर कंट्रोल करने के लिए केंद्रीय सप्लाई के तहत भोपाल से विक्टोरिया ज़िला अस्पताल दवाइयां भेजी गयी थीं, लेकिन वो दवा मरीज़ों का शुगर कंट्रोल नहीं कर पायी. इसका पता तब चला जब पांच हजार में से 4 हजार 800 टेबलेट मरीजों को बांटी जा चुकी थीं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट मिलते ही दवा का वितरण फौरन बंद कर दिया गया और बची हुई 200 टेबलेट शासन को लौटा दी गयीं. अधिकारियों ने बताया कि विक्टोरिया अस्पताल परिसर स्थित औषधि भंडार से जुलाई 2019 में डायबिटीज की उस दवा के नमूने लिए गए थे. ये भंडार सिविल सर्जन के अधीन आता है. सैंपल को जांच के लिए राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया था. वहां से नवंबर 2020 में रिपोर्ट आयी, जिसमें इस गड़बड़ी का पता चला.

4800 दवा बंटी ... 200 वापिस भेजीं
रिपोर्ट में दवा को अमानक बताया गया है. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. विक्टोरिया अस्पताल से तकरीबन 48 सौ टेबलेट बांटी जा चुकी थीं. हालांकि डॉक्टरों का कहना है टेबलेट भले ही अमानक पाई गई है, लेकिन इस दवा का किसी भी तरह से साइड इफेक्ट नहीं है. हां ये बीमारी रोकने में कामगार साबित नहीं हुई. यह दवा शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए थी. अमानक दवा होने के कारण ये मरीज़ों का शुगर लेवल कंट्रोल नहीं कर पायी.



जांच की रफ्तार इतनी मंदी क्यों
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिरकार सैंपल की रिपोर्ट आने में डेढ़ साल क्यों लग गए. और क्या दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट को लेकर भी जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं. अगर इस टेबलेट का जरा सा भी साइट इफेक्ट होता तो न जाने कितने मरीजों की जान आज खतरे में होती. जिन मरीज़ों का ये दवा लेने के बाद भी शुगर लेवल कंट्रोल नहीं हुआ, उनकी जान तो खतरे में पड़ी ही होगी.
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