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    Jabalpur : एक दीवार ने मिटाई 56 साल की दूरी, पुलिस की समझदारी से सुलझा मस्जिद विवाद

    पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बैठाकर विवाद सुलझा लिया.
    पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बैठाकर विवाद सुलझा लिया.

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    जबलपुर.जबलपुर (Jabalpur) में मस्जिद की जिस जमीन को लेकर दो समुदाय बीते 56 साल से एक दूसरे के दुश्मन बने हुए थे वह मुद्दा महज 5 बैठकों में सुलझा लिया गया. अपने आप में जहां यह विवाद बड़ा था वहीं इसका समाधान अब मिसाल बन गया है. यह सब संभव हुआ जबलपुर पुलिस (Police) के अधिकारियों की बदौलत.

    ऐसे हुई पहल
    बीते 56 वर्षों से जबलपुर के हिंदू-मुस्लिम समाज के बीच चले आ रहे माढ़ोताल की औलिया मस्जिद विवाद का अंतत: सुखद हल हो गया. मस्जिद की ज़मीन पर बाहरी लोगों ने कब्ज़ा कर रखा था. इस जमीन को लेकर दो समुदायों के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चली आ रही थी. गोहलपुर थाना प्रभारी रविन्द्र गौतम ने यह मामला सीएसपी अखिलेश गौर, एएसपी अमित कुमार और एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा के सामने रखा. जिसके बाद शुरू हुआ विवाद को सुलझाने का प्रयास.

    दोनों पक्षों को बिठाकर निकलवाया रिकॉर्ड
    विवाद सुलझाने के लिए 70 साल पुराना रिकॉर्ड खंगाला गया. विवाद से जुड़े हिंदू-मुस्लिम पक्षों को एक मंच पर लाकर पांच बैठकें भी करवाई गईं.प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इस ज़मीन का सीमांकन कराया गया. और इसके बाद दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद मस्जिद की ज़मीन पर चारों ओर से बाउंड्रीवॉल बना कर ज़मीन सुरक्षित कर दी गयी. इसमें सबकी सहमति ली गई. विवाद की जटिलता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा डीजीपी विवेक जौहरी भी जबलपुर एसपी रहते हुए ये विवाद नहीं सुलझा पाए थे.



    यह था विवाद
    औलिया मस्जिद को लेकर 1970 में वक्फ बोर्ड ने दावा खारिज करते हुए 1977 में नूर अली शाह को मुतवल्ली नियुक्त कर दिया था. इसके बाद जनाब खां नाम के शख्स ने आसपास की ज़मीन बेचना शुरू कर दिया. सन 1992 में इसके कई हकदार बन गए. इसे लेकर मुस्लिम समाज में आक्रोश बढ़ गया. हजारों लोगों ने थाने का घेराव किया. तनाव देखते हुए यहां पहले जिला पुलिस और बाद में सशस्त्र बल की स्थाई सुरक्षा चौकी बना दी गई. 1994 से 2000 के बीच मस्जिद का पक्का निर्माण हुआ. इसी बीच संतोष यादव नाम के व्यक्ति भी दावेदारों में शामिल हो गया. बाद में जेडीए की भूमि पर हनुमान मंदिर बना लिया गया. फिर हर शुक्रवार सहित बड़े अवसरों पर विवाद की स्थिति बनने लगी.

    पेट्रोल पंप बन गया
    मस्जिद से लगी भूमि पर रज्जब अली सुलेमान का पेट्रोल पम्प स्थापित हो गया. खसरा नम्बर 155 के कुल रकबा 1.22 एकड़ की भूमि का मामला पहली बार प्रकाश में आया. 1909 से 1964 तक भूमि मस्जिद परिसर के रूप में दर्ज रही. 5 दिसम्बर 1964 को इसे वक्फ सम्पत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया. इसके बाद यहां रहने वाले जनाब खां और नारायण दास शर्मा के बीच विवाद शुरू हो गया. ये विवाद दो वर्ष तक चलता रहा. पहले नारायण दास शर्मा के नाम और फिर 1968 में जनाब खां के नाम पर जमीन दर्ज हो गई. इस पूरे घटनाक्रम में हमेशा राजस्व विभाग की मिलीभगत सामने आती रही.

    बाउंड्री वॉल से समस्या का समाधान
    जब मामला सुलझा तो दोबारा कोई इस पर अवैध अधिकार न जता पाए इसलिए एक बाउंड्रीवाल बना कर इस विवाद का हमेशा के लिए पटाक्षेप कर दिया गया.

    मस्जिद कमेटी ने अधिकारियों का किया सम्मान
    औलिया मस्जिद की जमीन का विवाद सुलझाने के बाद मस्जिद कमेटी के पदाधिकारी बेहद खुश हैं. बिना किसी विवाद और कानूनी लड़ाई के इस समस्या का समाधान निकालने के लिए उन्होंने एसपी, एएसपी, सीएसपी और थाना प्रभारी का सम्मान किया.
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