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जबलपुर: नहीं मिल रहे निवेशक, अब संभाग के लिए इन्वेस्टर सम्मिट कराएगी सरकार

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 12, 2019, 5:15 PM IST
जबलपुर: नहीं मिल रहे निवेशक, अब संभाग के लिए इन्वेस्टर सम्मिट कराएगी सरकार
औद्योगिक निवेशकों को तरस रहा जबलपुर संभाग

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में औद्योगिक क्रांति (Industrial revelution) लाने की बात तो हो रही है लेकिन जबलपुर (Jabalpur) के हाथ अब तक खाली हैं. हाल ही में हुआ मैग्नीफिसेंट एमपी (Magnificient MP) प्रदेश के लिए तो उपलब्धि भरा रहा लेकिन संस्कारधानी में किसी भी उद्योग समूह ने रुचि नहीं दिखाई है.

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जबलपुर. औद्योगिक क्षेत्र में संस्कारधानी जबलपुर (Jabalpur) के पिछड़ेपन की बदनसीबी को भाजपा (BJP) सरकार के इन्वेस्टर सम्मिट (Investor Summit) हो या फिर कांग्रेस (Congress) शासन का मैग्नीफिसेंट एमपी (Magnificient MP) कोई भी इसे दूर नहीं कर पाया है. पिछले माह इंदौर (Indore) में हुए मैग्नीफिसेंट एमपी सम्मिट में कई उद्योगपतियों ने शिरकत की. एमपी में करीब 130 उद्योगपति गोल्ड कैटेगरी तो वहीं 700 उद्योगपति ग्रीन कैटेगरी के शामिल हुए लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि जबलपुर में उद्योग लगाने पर किसी ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई, जबकि क्षेत्र में औद्योगिक निवेश के लिए जबलपुर संभाग दिल खोलकर निवेशकों का इंतज़ार कर रहा है. आलम ये है कि इस शहर में बने 6 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र खाली जमीन लिए आज भी उद्योग लगाने की गुहार लगा रहे हैं.

जबलपुर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में खाली पड़ी ज़मीनें
>> उमरिया डूंगरिया औद्योगिक क्षेत्र - यहां कुल 517 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है, जिसमें से 162 हेक्टेयर आवंटित की गई है, जबकि 355 हेक्टेयर जमीन आज भी खाली पड़ी है.

>> हरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र - यहां कुल 188 हेक्टेयर का क्षेत्रफल है, जिसमें से मात्र 65 हेक्टेयर जमीन ही आवंटित की गई है. 123 हेक्टेयर जमीन आज भी वीरान पड़ी है.

>> मनेरी औद्योगिक क्षेत्र - यहां कुल क्षेत्रफल 486 हेक्टेयर है, जबकि उद्योग के नाम पर आवंटित क्षेत्रफल मात्र 108 है. यानी यहां भी 298 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है.

>> फुडपार्क मनेरी - यहां कुल 30 हेक्टेयर का क्षेत्रफल मौजूद है, जिसमें से मात्र 11 हेक्टेयर ज़मीन ही अब तक आवंटित कीय गई है जबकि 19 हेक्टेयर जमीन आज भी खाली पड़ी है.

>> अमकुही कटनी औद्योगिक क्षेत्र - यहां कुल 90 हेक्टेयर क्षेत्रफल मौजूद है, जबकि 48 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर दी गई है. 42 हेक्टेयर जमीन आज भी खाली है.
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>> स्टोन पार्क औद्योगिक क्षेत्र - यहां कुल 39 हेक्टेयर का क्षेत्रफल मौजूद है, जिसमें से सिर्फ 14 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है. 25 हेक्टेयर जमीन आज भी खाली है.

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जबलपुर संभाग के लिए अलग से सम्मिट कराने की तैयारी में कमलनाथ सरकार


इन उद्योगों का हब बन सकता है संभाग
जबलपुर के क्षेत्रफल और इसकी बसाहट को देखते हुए यहां पर कई तरह के उद्योग फल-फूल सकते हैं. सबसे पहला कपड़ा उद्योग जबलपुर के लिए वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि कपड़े की खपत शहर और आसपास के इलाकों में सबसे ज्यादा है. वहीं फार्मास्यूटिकल सेक्टर में जबलपुर एक हब के रूप में आगे बढ़ सकता है. यहां पर कई दवाइयों की मैन्युफैक्चरिंग भी हो सकती है, लेकिन अब तक इस ओर कोई प्रयास नहीं हुए. कृषि और खाद्य प्रसंस्करण की सबसे ज्यादा संभावना संस्कारधानी में बनती है फिर भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट या संबंधित उद्योग लगाने में हम कोई कदम आगे नहीं बढ़ सके.

जबलपुर संभाग के लिए इन्वेस्टर सम्मिट की तैयारी 
इन्वेस्टर सम्मिट के बाद भले ही शहर के हाथ कुछ ना लगा हो लेकिन जिला प्रशासन अब संभाग स्तरीय इन्वेस्टर समिट की तैयारी कर रहा है. जिले के कलेक्टर भरत यादव ने बताया कि जल्द ही जबलपुर संभाग के लिए एक इन्वेस्टर सम्मिट कराया जाएगा, जिसके माध्यम से भौगोलिक तौर पर निवेशकों को जबलपुर संभाग की विशेषताओं से अवगत कराया जाएगा.

सीएम कमलनाथ की महाकौशल में विशेष रुचि
औद्योगिक रूप से शहर के पिछड़ेपन की बात पर जिले के प्रभारी मंत्री प्रियव्रत सिंह का कहना है कि खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ की जबलपुर और आसपास के महाकौशल अंचल के लिए विशेष रुचि हमेशा से रही है और सरकार का प्रयास है कि हर हाल में इस क्षेत्र में भी निवेश लाया जाए. जबलपुर जिले या संभाग में उद्योगपतियों के ना आने से शहर के युवा आज भी पलायन करने मजबूर हैं. अगर जिले में यहां की विशेषता को अनुरूप रखते हुए निवेशक आते हैं तो बेशक इसका सीधा लाभ युवाओं और बेरोजगारों को मिलेगा.

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First published: November 12, 2019, 5:15 PM IST
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