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कमलनाथ सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, महिलाओं को हेलमेट ना पहनने की छूट क्यों दी?

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 23, 2019, 1:27 PM IST
कमलनाथ सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, महिलाओं को हेलमेट ना पहनने की छूट क्यों दी?
विधि छात्र का आरोप है कि राज्य में हेलमेट वाहन अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है

भोपाल के एक विधि छात्र (Law Student) हिमांशु दीक्षित ने मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम में महिला दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट (Helmet) से छूट को चुनौती दी है. उनकी याचिका पर हाईकोर्ट (High Court) ने राज्य सरकार को नोटिस (Notice) जारी किया है.

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जबलपुर. महिला दोपहिया वाहन चालकों (Women bike riders) के लिए हेलमेट (Helmet) की अनिवार्यता को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में दोपहिया चलाने वाली महिलाओं या पीछे बैठने वाली महिलाओं के लिए हेलमेट की अनिवार्यता ना होने को चुनौती दी गई है. ये याचिका भोपाल के विधि छात्र हिमांशु दीक्षित ने दायर की है.

राज्य सरकार का नियम संविधान सम्मत नहीं
भोपाल एलएनयूआई के छात्र हिमांशु दीक्षित द्वारा दायर की गई इस याचिका में दलील दी गई है कि मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम 1994 के नियम 213 (2) की वैधता कई प्रश्न खड़े करती है. याचिकाकर्ता छात्र के मुताबिक मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129 के तहत दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य है. इस नियम में सिर्फ सिख समुदाय के वाहन चालकों को हेलमेट की अनिवार्यता से छूट दी गई है. वहीं दूसरी ओर इस नियम के तहत ये अधिकार राज्य सरकार के अधीन होता है जिसमें वह किसी भी समुदाय को उक्त प्रावधान से छूट दे सकता है.

याचिकाकर्ता ने यह दलील भी दी कि महिलाओं को प्रदेश सरकार ने हेलमेट से छूट दे दी है. आरोप ये भी लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा बनाया गया नियम ना केवल संविधान के अनुच्छेद 14,15(1), 21 का उल्लंघन करता है बल्कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के हेलमेट वाहन अधिनियम का उल्लंघन भी करता है.

News - हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है
हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है


पेश किए सड़क हादसों के आंकड़े
याचिकाकर्ता विधि के छात्र हिमांशु दीक्षित ने सुनवाई के दौरान आरटीआई द्वारा प्राप्त सड़क हादसों की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी और घटना में मृत या पीड़ित महिलाओं के आंकड़े भी पेश किए. मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव सहित विधि सचिव और परिवहन सचिव को नोटिस जारी करते हुए 2 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं.
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First published: October 23, 2019, 1:26 PM IST
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