निजी स्कूलों की मान्यता चैरिटी के लिए, मुनाफे के लिए नही: CBSE
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निजी स्कूलों की मान्यता चैरिटी के लिए, मुनाफे के लिए नही: CBSE
30 जुलाई को ऑनलाइन क्लासेस चलाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश को भी चुनौती दी गई थी

सीबीएसई (CBSE) के जवाब के बाद से निजी स्कूलों के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूती भी मिली है.

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जबलपुर.निजी स्कूलों को दी जाने वाली मान्यता के पीछे मुख्य उद्धेश्य चैरिटी का होता है ना कि मुनाफा कमाने का.यह कहना है सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन यानी सीबीएसई (CBSE) का. जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले में दायर की गयी याचिका की सुनवाई के दौरान CBSE ने ये जवाब पेश किया.

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ दायर आठ याचिकाओं पर सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया और यह मांग की गई कि निजी स्कूलों की तमाम याचिकाओं को हाईकोर्ट रद्द करे. उन्होंने पक्ष रखा कि निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस ही वसूलना चाहिए. सीबीएसई के जवाब के बाद से निजी स्कूलों के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूती भी मिली है.

ऑनलाइन क्लासेस के आदेश को भी चुनौती
वहीं दूसरी ओर 30 जुलाई को ऑनलाइन क्लासेस चलाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश को भी चुनौती दी गई थी, याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा इस मसले पर दायर संशोधन आवेदन को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. याचिकाकर्ता ने पक्ष रखा था कि आई एम ए समेत तमाम चिकित्सक ऑनलाइन क्लासेस से दूर रहने की बात कर रहे हैं.इस बीच प्रदेश सरकार की ओर से प्राइमरी कक्षाओं से लेकर सेकेंड्री कक्षाओं तक अलग-अलग पाली में ऑनलाइन क्लासेस चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं जो कहीं ना कहीं नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ किसी बड़े खिलवाड़ से कम नहीं है. बहरहाल इन तमाम याचिकाओं पर अब 1 सितंबर को अगली सुनवाई होगी.
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