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अफसरों की लापरवाही से डेढ़ करोड़ उपभोक्ता भर रहे हैं महंगा बिजली बिल, CM तक पहुंची शिकायत

Electricity Consumer News. अधिकारियों की इस लचर कार्यशैली के कारण पावर जनरेटिंग कंपनी को 1468 करोड़ का नुकसान हुआ. मध्य प्रदेश के पावर स्टेशनों से बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी.

Electricity Consumer News. अधिकारियों की इस लचर कार्यशैली के कारण पावर जनरेटिंग कंपनी को 1468 करोड़ का नुकसान हुआ. मध्य प्रदेश के पावर स्टेशनों से बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी.

Power Miss Management. इस मामले में शिकायतकर्ता पावर जनरेटिंग कंपनी के रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर बताते हैं कि अधिकार ...अधिक पढ़ें

जबलपुर. मध्य प्रदेश के उपभोक्ता महंगी बिजली के साथ साथ बिजली अफसरों के नकारेपन की मार भी झेल रहे हैं. अफसरों की गड़बड़ी के कारण प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ उपभोक्ताओं को महंगा बिल भरना पड़ रहा है. जब अफसरों की शिकायत सीएम से की गयी तब इसका खुलासा हुआ.

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सीएम से की गई एक शिकायत ने सनसनीखेज खुलासा किया है, मध्य प्रदेश के एक करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों के कु प्रबंधन के कारण हर माह महंगी बिजली की मार पड़ रही है.

1468 करोड़ का नुकसान
देश में मध्य प्रदेश राज्य ऐसा है जो सबसे महंगी बिजली अपने उपभोक्ताओं को बेच रहा है. जबकि मध्यप्रदेश में सर प्लस बिजली बनाने के साधन हैं और  प्रदेश दूसरे राज्यों को बिजली बेचने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके बावजूद हम अपने पड़ोसी राज्यों से कहीं ज्यादा महंगी बिजली खरीद रहे हैं.  आखिरकार ऐसा क्यों है?

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ये है मसला
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे एक पत्र में शिकायतकर्ता ने स्पष्ट लिखा कि मध्य प्रदेश के थर्मल यानि विद्युत ताप गृह मध्य प्रदेश भर की बिजली आपूर्ति करने में सक्षम हैं. बावजूद इसके वित्तीय वर्ष 2021-22 में पांच विद्युत ताप गृहों ने अपनी कुल क्षमता के मुताबिक  बिजली का उत्पादन  नहीं किया. अधिकारियों की इस लचर कार्यशैली के कारण पावर जनरेटिंग कंपनी को 1468 करोड़ का नुकसान हुआ. मध्य प्रदेश के पावर स्टेशनों से बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी. एनटीपीसी या अन्य निजी क्षेत्रों से मध्य प्रदेश की जनता के लिए महंगी दर पर बिजली खरीदी गई. इसका भार मध्य प्रदेश की आम जनता पर पड़ रहा है.

अगर आंकड़ों में गौर करें तो मध्य प्रदेश में कुल 5 विद्युत ताप गृह हैं

-बिरसिंहपुर विद्युत ताप गृह 1 और 2 जिसकी कुल क्षमता 840 मेगावाट है. इसमें सिर्फ 75 फ़ीसदी क्षमता के मुताबिक बिजली बनाई गई.

-बिरसिंहपुर ताप गृह नंबर 2 एवं 3 में कुल उपलब्ध क्षमता की 85 फीसदी बिजली उत्पादन किया गया.

-सतपुड़ा ताप गृह दो एवं तीन की कुल क्षमता 830 मेगावाट थी लेकिन इसमें भी उपलब्ध क्षमता का सिर्फ 70 फ़ीसदी बिजली उत्पादन किया गया.

-सिंगाजी खंडवा विद्युत ताप गृह नंबर 1 की कुल क्षमता 1200 मेगा वॉट की थी जिसकी क्षमता के मुताबिक कुल 85 फीसदी बिजली उत्पादित की गई

-सिंगाजी खंडवा ताप ग्रह नंबर 2 की कुल क्षमता 1320 मेगावाट है जिसमें 85 फीसदी बिजली उत्पादित की गई.

अफसरों पर एक्शन की मांग
इस मामले में शिकायतकर्ता पावर जनरेटिंग कंपनी के रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर बताते हैं कि अधिकारी जानबूझकर पावर स्टेशन से तय उत्पादन करने में अक्षमता बता रहे हैं. जबकि इन विद्युत ताप गृहों से प्रदेश के लिए पर्याप्त बिजली पैदा हो सकती है. आम जनता पर बिजली संकट का खतरा भी नहीं रहेगा. शिकायत पत्र में पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है.

Tags: Electricity Bills, Madhya pradesh latest news, Power consumers

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